विश्वकर्मा जयंती: मनोकामना पूर्ति के लिए चढ़ाएं ये प्रसाद, पाएं सुख-समृद्धि का वरदान

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
विश्वकर्मा जयंती: मनोकामना पूर्ति के लिए चढ़ाएं ये प्रसाद, पाएं सुख-समृद्धि का वरदान।
विश्वकर्मा पूजा पर जरूर लगाएं इन चीजों का भोग

सृष्टि के वास्तुकार को नमन: विश्वकर्मा पूजा का महात्म्य और भोग

भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें संसार का आदि वास्तुकार और कुशल शिल्पी माना जाता है, की जयंती हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है। मान्यता है कि उन्होंने अपने पिता भगवान ब्रह्मा के साथ मिलकर इस ब्रह्मांड की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, भव्य महल, रथ और नगरों का निर्माण उन्हीं की देन है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, वे निर्माण और शिल्प कला के प्रमुख देवता के रूप में पूजे जाते हैं। विश्वकर्मा पूजा, जिसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है, इसी शुभ दिन पर भगवान विश्वकर्मा के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं।

कब करें विश्वकर्मा का पूजन?

हर वर्ष 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में गोचर होता है, जो इस पर्व का आधार बनता है। यह विशेष पर्व चंद्रमा की स्थिति पर आधारित नहीं, बल्कि सूर्य की चाल से तय होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कन्या संक्रांति के दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था।

आम तौर पर, भाद्रपद माह के अंतिम दिन या अश्विन माह के आरंभ में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन होता है। इस दिन, सृष्टि के प्रथम अभियंता, शिल्पी और दिव्य वास्तुकार कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की विशेष आराधना की जाती है। विशेष रूप से, फैक्ट्रियों, कार्यस्थलों और मशीनरी से जुड़े लोग इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति भाव से विधि-विधान पूर्वक पूजा करते हैं।

श्रद्धा का प्रसाद: विश्वकर्मा पूजा के भोग

यह माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध मन, स्वच्छ वातावरण और पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान चढ़ाए जाने वाले प्रसाद का विशेष महत्व होता है। भगवान को भोग लगाने के बाद, इस प्रसाद को भक्तों में बांटना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन अर्पित किए जाने वाले मुख्य प्रसाद:

  • पंचामृत: दूध, दही, शहद, घी और शक्कर के मिश्रण से बना पंचामृत भगवान को अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • ताजे फल: केले, नारियल, अनार, अमरूद और अन्य मौसमी फल समृद्धि और शुभता के प्रतीक के रूप में चढ़ाना उत्तम है।
  • मिठाइयाँ: लड्डू, बूंदी या मोदक जैसी मिठाइयां भगवान विश्वकर्मा को अत्यंत प्रिय हैं और इन्हें पूजा में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।
  • नारियल व सुपारी: नारियल पवित्रता और सम्पन्नता का प्रतीक है। पूजा के उपरांत इसे प्रसाद के रूप में वितरित करना अति शुभ माना जाता है।
  • पान व इलायची: पान के पत्ते और इलायची भी शुभ माने जाते हैं और इन्हें पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है।

इन प्रसादों को चढ़ाने का महत्व इस विश्वास में निहित है कि भगवान विश्वकर्मा कार्यक्षेत्र में उन्नति, साधनों की सुरक्षा और व्यापार में वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए इन भोगों से कामकाज में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर पंचामृत, ताजे फल, मिठाइयां और नारियल का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है, जिससे कार्य में सफलता, साधनों की सुरक्षा और आर्थिक उन्नति के द्वार खुलते हैं।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *