गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक धमाका: 10,000 मीटर में जीता रजत पदक, ऊंची कूद में पूजा का टूटा सपना

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ग्लास्गो की बारिश में गुलवीर ने रचा इतिहास: 10,000 मीटर में जीता ऐतिहासिक रजत, तोड़ा अफ्रीकी धावकों का वर्चस्व

ग्लास्गो, 28 जुलाई: स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में जब आसमान से बारिश बरस रही थी, तब भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ट्रैक पर स्वर्णिम इतिहास लिख रहे थे। मंगलवार को राष्ट्रमंडल खेलों की 10,000 मीटर दौड़ में एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता गुलवीर ने वह कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर सका। उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण स्पर्धा में देश को पहला रजत पदक दिलाकर एथलेटिक्स जगत को चौंका दिया। सर्वेश कुशारे द्वारा ऊंची कूद में जीते गए रजत के बाद, एथलेटिक्स में भारत की झोली में गिरा यह दूसरा बड़ा पदक है।

पानी से लबालब भरे ट्रैक और मूसलाधार बारिश के बीच, राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी गुलवीर ने गजब के जुझारूपन का परिचय दिया। पूरी दौड़ के दौरान वे चतुर रणनीति के साथ शीर्ष धावकों के बीच अपनी जगह बनाए रहे। रेस के अंतिम क्षणों में उन्होंने बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और 27 मिनट 49.78 सेकंड के समय के साथ फिनिश लाइन पार कर दूसरा स्थान हासिल किया। इस कड़े मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (27:48.93) ने स्वर्ण और आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की (27:50.28) ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

अमेरिका में दिग्गज कोच स्कॉट सिमंस के मार्गदर्शन में निखर रहे गुलवीर के सामने केन्या के विश्व चैंपियन पदक विजेता डेनियल एबेयो जैसे कड़े प्रतिद्वंद्वी थे। लेकिन गुलवीर ने हार नहीं मानी और अंतिम लैप में मुलार्की को पछाड़ते हुए चांदी पर कब्जा जमाया। इस जीत के साथ एक दुर्लभ रिकॉर्ड भी बना—वर्ष 1986 के बाद यह पहला मौका है जब राष्ट्रमंडल खेलों की इस स्पर्धा के तीनों पदक विजेताओं में कोई भी अफ्रीकी धावक शामिल नहीं है। यह ऐतिहासिक पल 2022 बर्मिंघम खेलों में अविनाश साबले द्वारा केन्याई दबदबे को तोड़ने की यादें ताजा कर गया।

मैदान के दूसरी तरफ, महिलाओं की ऊंची कूद में भारत के लिए दिन थोड़ा फीका रहा। 19 वर्षीय एशियाई चैंपियन पूजा सिंह अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। भारी बारिश के कारण बाधित हुई प्रतियोगिता जब दोबारा शुरू हुई, तो पूजा 1.82 मीटर की ऊंचाई को पार करने के अपने तीनों प्रयासों में असफल रहीं। इसी के साथ इस युवा खिलाड़ी का पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया और उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा।


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