2030 कॉमनवेल्थ गेम्स: अहमदाबाद में इतिहास रचेगा भारत

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ahmedabad to host commonwealth games 2030 a historic moment in indias sporting history

अहमदाबाद 2030: कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी, भारत के खेल इतिहास में एक नया अध्याय!

यह खबर भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण लेकर आई है! अहमदाबाद को 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रतिष्ठित सेंटेनरी एडिशन की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। ग्लास्गो में आयोजित जनरल असेंबली में 74 सदस्य देशों की ओर से इस निर्णय पर मुहर लगना, देश के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है, खासकर ऐसे समय में जब पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने इन खेलों के आयोजन में रुचि कम दिखाई है।

यह महत्वपूर्ण फैसला तब आया है जब अहमदाबाद को कुछ समय पहले ही इवैल्युएशन कमिटी ने नाइजीरिया के अबुजा पर तरजीह दी थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बार के गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल होंगे, जो पिछले साल ग्लास्गो में हुए संक्षिप्त संस्करण से काफी अधिक है। एथलेटिक्स, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग जैसे प्रमुख खेलों के साथ-साथ पैरास्पोर्ट्स इवेंट्स भी दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। इसके अलावा, तीरंदाजी, बैडमिंटन, हॉकी, रग्बी सेवन, कुश्ती, शूटिंग, स्क्वैश और 3×3 बास्केटबॉल जैसे खेलों को भी कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

अहमदाबाद को यह अनूठी सौगात भी मिली है कि वह दो नए या पारंपरिक खेलों का प्रस्ताव रख सकता है, जिन्हें अक्टूबर 2030 में मौसम की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए अंतिम सूची में जोड़ा जा सकेगा। खेल कैलेंडर को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अगले महीने शुरू होगी, और पूरा कार्यक्रम अगले साल तक घोषित कर दिया जाएगा।

कॉमनवेल्थ गेम्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अध्यक्ष, पी.टी. ऊषा ने इस आयोजन को ‘अगले सौ साल की नींव’ करार दिया है। उनका मानना है कि यह न केवल कॉमनवेल्थ मूवमेंट के सौ साल पूरे करेगा, बल्कि खिलाड़ियों और समुदायों को एक साथ लाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह रोचक बात है कि 1930 में इन खेलों की शुरुआत कनाडा के हैमिल्टन शहर से हुई थी, लेकिन इस बार कनाडा ने मेजबानी के लिए बोली नहीं लगाई।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत ने इससे पहले 2010 में दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की थी। हालांकि, उस समय निर्माण में देरी और बजट में वृद्धि को लेकर कुछ आलोचनाएं हुई थीं। लेकिन इस बार, अहमदाबाद समिति ने पहले से मौजूद स्टेडियमों और बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की रणनीतिक योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य खर्च और समय दोनों की बचत करना है। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के प्रमुख, डोनाल्ड रुकारे ने इस बात पर जोर दिया है कि दुनिया पिछले दो दशकों में काफी बदल चुकी है और 2010 के अनुभव से महत्वपूर्ण सबक सीखे गए हैं।

सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के पीछे हटने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स का भविष्य कुछ समय के लिए अनिश्चित दिख रहा था, लेकिन ग्लास्गो के इस निर्णय से स्थिति को मजबूती मिली है। रुकारे को उम्मीद है कि 2030 से कॉमनवेल्थ स्पोर्ट का एक नया स्वर्ण युग शुरू होगा, और अहमदाबाद इस विशेष सेंटेनरी एडिशन की मेजबानी के लिए पूरी तरह से तैयार है।

खेल इतिहास को देखें तो ऑस्ट्रेलिया 2022 के बर्मिंघम गेम्स में शीर्ष पर रहा था, जिसमें इंग्लैंड, कनाडा, भारत और न्यूजीलैंड भी शीर्ष पांच में शामिल थे। अब अहमदाबाद इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक उत्कृष्ट आयोजन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, और पूरे देश में इस फैसले को लेकर जबरदस्त उत्साह का माहौल है।


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