IOA चुनावों में सादगी और शुचिता का नया अध्याय: स्टार खिलाड़ियों के लिए सख्त हुई आचार संहिता
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के आगामी चुनावों ने खेल जगत में हलचल तेज कर दी है। एथलीट आयोग और ‘उत्कृष्ट खिलाड़ियों’ (एसओएम) के चयन के लिए जारी की गई नई ‘आदर्श आचार संहिता’ ने इस बार चुनावी अखाड़े को बिल्कुल अलग और अनुशासित रंग दे दिया है। नए नियमों के तहत उम्मीदवारों के निजी जीवन पर टिप्पणी करने से लेकर सोशल मीडिया पर प्रचार करने तक, कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। आईओए और राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) के पदाधिकारियों को भी साफ हिदायत दी गई है कि वे पूरी तरह निष्पक्ष रहें।
चुनावी कार्यक्रम और प्रक्रिया
इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आगाज़ 3 नवंबर को होगा, जब एथलीट आयोग के 10 सदस्यों के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके बाद, 9 नवंबर को आठ ‘उत्कृष्ट खिलाड़ियों’ (स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ मेरिट) के चुनाव के लिए मतदान होगा। आधुनिकता को अपनाते हुए ये दोनों चुनाव पूरी तरह ऑनलाइन आयोजित किए जाएंगे। चुनाव अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव जल्द ही इसके विस्तृत दिशा-निर्देश साझा करेंगे।
मैदान में खेल जगत के दिग्गज
एथलीट आयोग की 10 सीटों (5 पुरुष और 5 महिला) के लिए 12 दिग्गज खिलाड़ी चुनावी मैदान में हैं, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू और मीराबाई चानू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनका चयन 17 राष्ट्रीय खेल महासंघों के दो-दो प्रतिनिधियों से बना 34 सदस्यीय निर्वाचक मंडल करेगा। दूसरी ओर, 8 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के पदों के लिए 80 उम्मीदवारों की सूची तैयार है, जिनमें 40 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हैं। इस दौड़ में वर्तमान आईओए अध्यक्ष पीटी उषा जैसी महान खिलाड़ी भी शामिल हैं।
प्रचार पर ‘डिजिटल’ और ‘पर्सनल’ पहरा
आचार संहिता के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार दूसरे की छवि बिगाड़ने वाला मौखिक या लिखित बयान नहीं दे सकेगा। आलोचना केवल नीतियों, कार्यक्रमों और पिछले रिकॉर्ड तक ही सीमित होनी चाहिए। सबसे रोचक बात यह है कि इस चुनाव में सोशल मीडिया या नए डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रचार करने पर पूरी तरह रोक है। उम्मीदवार न तो कोई सार्वजनिक सभा कर सकते हैं और न ही कोई बड़ी रैली।
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी खिलाड़ी के निजी जीवन को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जाएगा। साथ ही, जातिगत या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर वोट मांगना सख्त वर्जित है। उम्मीदवार केवल एक लिखित दस्तावेज के माध्यम से अपनी योजनाओं को निर्वाचक मंडल के सामने रख सकते हैं, जिसे चुनाव अधिकारी द्वारा ही प्रकाशित किया जाएगा।
भ्रष्टाचार और प्रभाव पर जीरो टॉलरेंस
चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रिश्वत, उपहार, या किसी भी तरह के प्रलोभन पर कड़ी पाबंदी है। आचार संहिता कहती है कि उम्मीदवार चुनाव में अत्यधिक खर्च न करें ताकि सभी को समान अवसर मिले। इसके अलावा, आईओए के पदाधिकारियों द्वारा ऐसी किसी भी ‘तदर्थ नियुक्ति’ पर रोक लगा दी गई है जो मतदाताओं को प्रभावित कर सके। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद से कार्यकारी समिति के सदस्य अपने विवेकाधीन कोष से कोई नया फंड भी जारी नहीं कर सकेंगे।
गोपनीयता और निष्पक्षता की कसौटी
वोटिंग की गोपनीयता बनाए रखने के लिए मतदाताओं को सार्वजनिक रूप से यह बताने की अनुमति नहीं है कि वे किसे वोट देंगे। चुनाव के दौरान सरकारी या आधिकारिक यात्राओं का उपयोग चुनावी गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन और कर्मचारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार न करें।
विवाद निपटारे का अंतिम रास्ता
चुनाव अधिकारी का निर्णय ही अंतिम और सर्वोपरि होगा। हालांकि, यदि चुनाव प्रक्रिया के नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कोई शिकायत होती है, तो उसे परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर ‘राष्ट्रीय खेल पंचाट’ में चुनौती दी जा सकती है।
भारतीय खेल प्रशासन में अनुशासन और नैतिकता का यह नया पैमाना आने वाले समय में एक मिसाल पेश कर सकता है।
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