कोर्ट पर जब भी पीवी सिंधु और अकाने यामागुची का आमना-सामना होता है, तो वह महज एक मुकाबला नहीं, बल्कि जज्बे और प्रतिशोध की एक दास्तां बन जाता है। यामागुची ने समय-समय पर सिंधु से कई बड़े खिताब छीने हैं, जिनमें एशियन चैंपियनशिप का वह कसक भरा फाइनल भी शामिल है। लेकिन रविवार को 31 साल की उम्र में सिंधु ने एक नई पटकथा लिखी। अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी को 21-17, 21-17 से धूल चटाते हुए उन्होंने न केवल जापान ओपन सुपर 750 का खिताब अपने नाम किया, बल्कि कोर्ट पर अपनी उसी पुरानी आक्रामकता और ताकत का लोहा भी मनवाया।
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जापान की धरती पर कोई बड़ा खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर सिंधु ने वहां के शोर मचाते दर्शकों को खामोश कर दिया। उनकी यह जीत टोक्यो 2021 ओलंपिक के उस ऐतिहासिक क्वार्टर फाइनल की याद दिलाती है, जिसने उनके करियर के ‘3.0 फेज’ की नींव रखी थी। पिछले सात साल बीएफडब्ल्यू वर्ल्ड टूर पर किसी बड़े खिताब के बिना सूखे गुजरे थे। हालांकि 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण जीता, लेकिन बाएं टखने के स्ट्रेस फ्रैक्चर ने न केवल उनका कीमती समय छीना, बल्कि उनके खेल की लय को भी काफी प्रभावित किया।
बीते कुछ समय में आलोचक उन्हें उस दिग्गज खिलाड़ी की परछाईं बताने लगे थे, जो कभी दुनिया के हर बड़े मंच पर राज करती थी। मगर जापान में इस हफ्ते दो बार की ओलंपिक पदक विजेता ने स्पष्ट कर दिया कि उनका सफर अभी थमा नहीं है। लॉस एंजिल्स ओलंपिक का लक्ष्य सामने रख चुकीं सिंधु 2026 के सत्र में अपनी बेहतरीन लय में दिखीं और लगातार शुरुआती दौर की बाधाओं को पार करती रहीं। अंततः जापान में उन्हें वह बड़ी सफलता हाथ लगी, जिसका इंतजार वह खुद और पूरा देश लंबे समय से कर रहा था।
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मैच के अंतिम क्षणों में जब स्कोर 20-17 था, लाइन जज ने यामागुची के शॉट को ‘वाइड’ करार दिया। सिंधु को लगा कि जीत उनके पास आ चुकी है, लेकिन जापानी खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और रिव्यू ले लिया। खिताब और सिंधु के बीच खड़े वे 30 सेकंड भारी बेचैनी और सन्नाटे से भरे थे। जैसे ही फैसला सिंधु के हक में आया, उन्होंने झुककर श्रद्धा से कोर्ट को चूमा और अपनी बाहें फैलाकर जीत का जश्न मनाया। भावुक सिंधु ने तुरंत अपने कोच इरवानस्याह आदि प्रतामा को गले लगाया, जो इस संघर्षपूर्ण सफर में उनके सारथी रहे हैं।
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