ग्लास्गो की धरती पर रचा गया इतिहास: दुखों के साये से निकलकर शर्मिला ने भारत को दिलाया ऐतिहासिक स्वर्ण
दो वर्ष की कोमल आयु में पोलियो का दंश झेलना और फिर शादी के बाद अपमान की गहरी चोट सहना—शर्मिला धनकर की कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि राख से उठकर आसमान छूने की है। शर्मिला ने राष्ट्रमंडल खेलों की महिला शॉट पुट (एफ57) स्पर्धा में स्वर्णिम प्रहार कर वह कीर्तिमान स्थापित किया है, जो उनसे पहले कोई भारतीय पैरा एथलीट नहीं कर सका। 40 वर्षीय शर्मिला ने 9.81 मीटर के अपने सत्र के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पैरा एथलेटिक्स पदक के 20 साल लंबे सूखे को भी खत्म कर दिया।
इस ऐतिहासिक दिन की चमक तब दोगुनी हो गई जब भारत की ही शिल्पा शायला ने कांस्य पदक अपने नाम किया। शिल्पा ने 7.26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया था। हालांकि, यह पदक नाटकीय उतार-चढ़ाव के बाद मिला। शुरुआत में नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी पदक की दौड़ में थीं, लेकिन भारतीय दल की सटीक आपत्ति और आधिकारिक समीक्षा के बाद नाइजीरियाई खिलाड़ी के प्रयास को ‘फाउल’ करार दिया गया। इसके बाद चौथे स्थान पर रहीं शिल्पा को कांस्य पदक मिला, जिसकी घोषणा होते ही वह भावुक होकर शर्मिला के गले लग गईं।
एफ57 श्रेणी उन योद्धाओं के लिए है जो अंगों की अक्षमता या मांसपेशियों की कमजोरी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। हरियाणा के छितरोली की रहने वाली शर्मिला का यह सफर आसान नहीं था। पोलियो के कारण बायां पैर गंवाने और एक कड़वी शादी के सदमे के बाद, उनके मायके के सहयोग ने उन्हें दोबारा खड़ा किया। उन्होंने रेवाड़ी के व्यवसायी अजित सिंह से विवाह कर जीवन की नई शुरुआत की।
शर्मिला की खेल प्रतिभा को पहचानने वाले उनके पति अजित ही थे, जिन्होंने 2020 में उन्हें कोच टेक चंद के पास भेजा। एक साल के भीतर ही शर्मिला राष्ट्रीय चैंपियन बन गईं और शॉट पुट के साथ चक्का फेंक में भी देश की शीर्ष खिलाड़ी बनकर उभरीं। फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण जीतने वाली शर्मिला बर्मिंघम खेलों में पदक से चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने कसर पूरी कर दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गौरवशाली क्षण पर ‘एक्स’ पर लिखा, “ग्लास्गो में इतिहास रचा गया! शर्मिला को इस विशेष स्वर्ण पदक के लिए बहुत बधाई। उनके प्रदर्शन ने राष्ट्रमंडल खेलों में 20 साल का इंतजार खत्म किया है।” खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी उनके जीवट की सराहना करते हुए कहा कि शर्मिला ने विश्व स्तर पर भारत का मस्तक ऊंचा किया है। शर्मिला की यह जीत साबित करती है कि यदि हौसला बुलंद हो, तो अतीत की कड़वाहट को भविष्य की मिठास में बदला जा सकता है।
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