रेडवुड सिटी (USA) में आयोजित 2026 सिलिकॉन वैली ओपन में भारत की उभरती हुई स्क्वैश सनसनी अनाहत सिंह का साहसिक अभियान शनिवार को थमा। 18 वर्षीय अनाहत को सेमीफाइनल के कड़े मुकाबले में मलेशिया की दिग्गज खिलाड़ी शिवसंगरी सुब्रमण्यम से हार का सामना करना पड़ा। अनाहत ने मैच का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया और पहला गेम 11-5 से जीतकर बड़े उलटफेर की उम्मीद जगा दी थी। हालांकि, तीसरी वरीयता प्राप्त सुब्रमण्यम ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए शानदार वापसी की और अगले तीन गेम 11-6, 11-4, 11-7 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया। गौरतलब है कि सुब्रमण्यम ने ही आइची-नागोया एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक मैच में भी अनाहत को मात दी थी।
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भले ही अनाहत सेमीफाइनल की बाधा पार न कर पाई हों, लेकिन रेडवुड सिटी में उनकी ऐतिहासिक जीत लंबे समय तक याद रखी जाएगी। इस टूर्नामेंट में उन्होंने मिस्र की दो दिग्गज खिलाड़ियों को धूल चटाकर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अनाहत ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश के लिए दुनिया की नंबर तीन और टॉप सीड खिलाड़ी नूर अल शेरबिनी को सीधे गेमों में 11-8, 11-8, 11-7 से हराकर स्क्वैश जगत को चौंका दिया। इसके बाद, छठी वरीयता प्राप्त सलमा हनी के खिलाफ उन्होंने जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। दो बार पिछड़ने के बावजूद अनाहत ने हार नहीं मानी और 4-11, 11-8, 4-11, 11-2, 11-5 से मुकाबला अपने नाम किया। मैच के अंतिम दो गेमों में उनका दबदबा वाकई काबिले तारीफ था।
सिलिकॉन वैली ओपन अनाहत के लिए सीखने का एक बड़ा मंच साबित हुआ है, जो उन्हें भविष्य में एक और परिपक्व खिलाड़ी बनाएगा। विश्व चैंपियन अल शेरबिनी को हराने के बाद अनाहत ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “मुझे यकीन नहीं था कि स्क्वैश की इतनी बड़ी दिग्गज के खिलाफ मैच इतना सीधा रहेगा। मैच से पहले भारतीय नेशनल कोच ने मेरा हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि अगर मैं अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाऊं, तो जीत मुमकिन है। मैंने उन्हें (शेरबिनी को) खेलते हुए देखकर ही स्क्वैश सीखा है और इत्तेफाक से हमारे कोच ग्रेग भी एक ही हैं। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं और उन्हीं की तरह करियर में बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हूं।”
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अनाहत ने आगे कहा कि शेरबिनी हर स्क्वैश खिलाड़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने स्वीकार किया, “मैंने सोचा था कि मुझे उनकी लय समझने में वक्त लगेगा, लेकिन मेरा गेम प्लान पूरी तरह सटीक रहा और मैं उसी पर अडिग रही। मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि मैंने यह मैच जीत लिया है। इस जीत ने मुझे अपार खुशी दी है।” भले ही अनाहत का खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन इस टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन ने भारतीय स्क्वैश के सुनहरे भविष्य की उम्मीदें जरूर जगा दी हैं।
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