थॉमस कप के मौजूदा चैंपियन भारत का सामना शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की कड़ी चुनौती से होगा। भारतीय टीम का लक्ष्य इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को जीतकर अपने दूसरे खिताब की ओर मजबूती से कदम बढ़ाना है। साल 2022 में भारत ने इस प्रतिष्ठित विश्व टीम बैडमिंटन चैंपियनशिप को जीतकर इतिहास रचा था। इस बार ग्रुप-ए में दूसरे स्थान पर रहते हुए भारत अंतिम आठ में पहुंचा है, जहां उसकी भिड़ंत ताइपे से होगी, जिसे अब भी अपने पहले थॉमस कप खिताब की तलाश है। भारत ने टूर्नामेंट में कनाडा को 4-1 और ऑस्ट्रेलिया को 5-0 से हराकर धमाकेदार शुरुआत की थी, हालांकि चीन के खिलाफ उसे 2-3 से करीबी हार झेलनी पड़ी।
चीनी ताइपे की टीम रैंकिंग और फॉर्म के मामले में काफी संतुलित है। उनकी कमान दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी चोउ टिएन चेन के हाथों में है। इसके अलावा, ऑल इंग्लैंड चैंपियन लिन चुन-यी (नंबर 8) और ची यू जेन (नंबर 21) उनकी एकल चुनौती को घातक बनाते हैं। युगल मुकाबलों में भी ताइपे के पास चिउ सियांग चीह और वांग ची-लिन (नंबर 14) के साथ-साथ ली झे-हुई और यांग पो-सुआन (नंबर 16) जैसी वर्ल्ड क्लास जोड़ियां मौजूद हैं, जो किसी भी टीम का खेल बिगाड़ने का दम रखती हैं।
दूसरी तरफ, भारतीय खेमा भी पूरे आत्मविश्वास में नजर आ रहा है। टीम के युवा सनसनी आयुष शेट्टी अपनी शानदार लय को बरकरार रखे हुए हैं। बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप के उपविजेता रहे आयुष ने यहां अब तक अपने तीनों मैच जीतकर सबको प्रभावित किया है। वहीं, अनुभवी एचएस प्रणय और किदांबी श्रीकांत तीसरे एकल की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। विशेषकर श्रीकांत ने चीन के लू गुआंग झू के खिलाफ हार के जबड़े से जीत छीनकर अपनी क्लास दिखाई है, ठीक वैसे ही जैसे 2022 की खिताबी जीत में प्रणय ने अहम भूमिका निभाई थी। लक्ष्य सेन ने भले ही पिछले दो रोमांचक मैच गंवाए हों, लेकिन उनके खेल के स्तर ने विरोधियों को डराया जरूर है।
क्वार्टर फाइनल में भारत की जीत की राह काफी हद तक लक्ष्य सेन पर निर्भर करेगी, जिनका सामना जापान के कोडाई नाराओका जैसे प्रतिद्वंद्वी से हो सकता है, जिनके खिलाफ उनका रिकॉर्ड थोड़ा कमजोर रहा है। युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की स्टार जोड़ी चोट से उबरने के बाद लय पकड़ रही है। चीन के खिलाफ करीबी हार के बाद वे नॉकआउट चरण के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं। हरिहरन अमसाकरुणन और एमआर अर्जुन की जोड़ी भी अब तक तीन में से दो मैच जीतकर टीम को मजबूती दे रही है। भारत ने 2022 में स्वर्ण जीतने के अलावा 1952, 1955 और 1979 में भी कांस्य पदक अपने नाम किए हैं।
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