राजस्थान निकाय चुनाव में 152 FIR का दावा, पार्षदों के कथित अपहरण पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पार्षदों की बाड़ेबंदी और कथित अपहरण को लेकर राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने करीब 152 एफआईआर दर्ज होने का दावा करते हुए पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है।

डोटासरा ने 152 FIR का किया दावा

गोविंद सिंह डोटासरा के मुताबिक, निकाय चुनाव के दौरान और उसके बाद पार्षदों के कथित अपहरण और उन्हें जबरन ले जाने की शिकायतों को लेकर करीब 152 एफआईआर दर्ज हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्षद अपनी इच्छा से अलग-अलग जगह गए थे, तो इतनी संख्या में अपहरण की शिकायतें और मुकदमे क्यों दर्ज किए गए।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि कई मामलों में पुलिस का दबाव बनाकर पार्षदों को बाड़ेबंदी में ले जाया गया। हालांकि, ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं और पुलिस की ओर से इन सभी दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

बाड़ेबंदी को लेकर पहले से चल रहा था विवाद

नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए मतदान से पहले ही कांग्रेस और BJP ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी थी। दोनों दलों का उद्देश्य क्रॉस-वोटिंग की आशंका को कम करना था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के कई हिस्सों में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि पुलिस और प्रशासन के जरिए उसके पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है। BJP और कांग्रेस दोनों ने अपने पार्षदों को अलग-अलग स्थानों पर रखा था।

कुछ मामले हाईकोर्ट तक पहुंचे

पार्षदों को कथित तौर पर जबरन ले जाने के आरोपों से जुड़े कुछ मामले राजस्थान हाईकोर्ट तक भी पहुंचे। श्रीविजयनगर नगर निकाय से जुड़े एक मामले में एक निर्वाचित पार्षद के कथित अपहरण की याचिका दायर हुई थी।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने संबंधित पार्षद को तलाश लिया और उन्हें मतदान करने का अवसर मिला। बाद में अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निपटारा कर दिया, जबकि चुनाव परिणाम से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई जारी रही।

डोटासरा बोले- सत्ता के दबाव में जांच बंद हुई

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिन मामलों में एफआईआर दर्ज हुईं, उनमें बाद में गिरफ्तारी नहीं की गई और कुछ मामलों की जांच सत्ता के दबाव में रोक दी गई। उन्होंने पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

डोटासरा ने कहा कि इन घटनाओं का राजनीतिक जवाब आगामी पंचायत चुनाव में दिया जाएगा। उनके बयान को कांग्रेस के राजनीतिक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए; पुलिस मुख्यालय की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

BJP ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयान

BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और जहां शिकायतें मिलीं, वहां पुलिस ने नियमानुसार मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने 152 एफआईआर के आंकड़े पर स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।

BJP विधायक गोपाल शर्मा ने डोटासरा के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्हें राजनीतिक आरोप बताया। इस तरह निकाय चुनाव के बाद भी दोनों दलों के बीच पार्षदों की बाड़ेबंदी और पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दल पंचायत चुनाव की तैयारियों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में पार्षदों के कथित अपहरण, एफआईआर और बाड़ेबंदी का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है।

फिलहाल 152 एफआईआर का आंकड़ा डोटासरा का दावा है। दूसरी ओर BJP ने आरोपों को खारिज किया है और पुलिस की ओर से सभी मामलों की स्थिति पर विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए पूरे मामले की तस्वीर संबंधित एफआईआर, जांच और अदालतों में चल रही कार्यवाही से ही स्पष्ट होगी।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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