छाता चीनी मिल को लेकर घमासान, एथेनॉल प्लांट की मंजूरी के बाद भी धरना जारी; बढ़ी सियासी हलचल

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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मथुरा के छाता में बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब स्थानीय मुद्दे से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है। 13 अगस्त से जारी धरने में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी है। एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बावजूद आंदोलनकारी पहले चीनी मिल शुरू करने की मांग पर अड़े हैं।

13 अगस्त से जारी है चीनी मिल आंदोलन

छाता चीनी मिल को फिर से चालू कराने की मांग को लेकर पूर्व सैनिक ललित कर्मयोगी की अगुवाई में धरना शुरू किया गया था। आंदोलन में आसपास के गांवों के लोग भी लगातार जुड़ते गए।

रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं। हाल के दिनों में पुलिस कार्रवाई के बाद भी एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग दोबारा धरनास्थल पर जुटे।

एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट से मंजूरी

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सितंबर में बंद छाता चीनी मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। परियोजना की लागत 200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल होगी।

सरकार की योजना के मुताबिक, प्लांट में गन्ने के अलावा मक्का और धान जैसे फीडस्टॉक का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। सरकार इसे बंद पड़े मिल परिसर के पुनर्विकास और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने की योजना से जोड़ रही है।

आंदोलनकारियों की मांग- पहले चीनी मिल शुरू हो

एथेनॉल प्लांट की मंजूरी के बावजूद आंदोलनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं। पूर्व सैनिक ललित कर्मयोगी और उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी मांग छाता चीनी मिल को दोबारा शुरू कराने की है।

आंदोलनकारियों के मुताबिक, पहले एथेनॉल प्लांट स्थापित करने और उसके बाद चीनी मिल शुरू करने की प्रक्रिया में समय लगेगा। इसलिए वे सीधे चीनी मिल शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई के बाद फिर जुटे ग्रामीण

21 सितंबर की रात पुलिस-प्रशासन ने धरनास्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाया और वहां लगे टेंट आदि हटाए। इसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी। अगले दिन आसपास के कई गांवों से किसान और ग्रामीण फिर मिल परिसर की ओर पहुंचे।

इसी घटनाक्रम के दौरान वाल्मीकि समाज और गन्ना मंत्री से जुड़ी कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर चार नामजद लोगों समेत करीब 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह कार्रवाई पुलिस की ओर से दर्ज शिकायत और आरोपों पर आधारित है।

धरने में महिलाओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी

आंदोलन की कवरेज में महिलाओं समेत अलग-अलग वर्गों की भागीदारी बढ़ने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में राजनीतिक दलों से जुड़े स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का भी उल्लेख है।

हालांकि, यह कहना कि आंदोलन किसी विशेष राजनीतिक दल या मंत्री के विरोधियों के नियंत्रण में है, एक राजनीतिक दावा/व्याख्या होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्य रूप से चीनी मिल बनाम एथेनॉल प्लांट की मांग और आंदोलन के विस्तार की जानकारी सामने आई है।

मंत्री लक्ष्मी नारायण का क्या कहना है?

गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण छाता क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होंने बंद मिल को दोबारा शुरू करने की बात कही है और एथेनॉल परियोजना को इसी परिसर के पुनर्विकास से जोड़कर देखा है। अगस्त में उन्होंने सितंबर में चीनी मिल के शिलान्यास की घोषणा भी की थी।

बाद की रिपोर्टों में मंत्री की ओर से कहा गया कि छाता चीनी मिल 19 साल से बंद है और इसके पुनरुद्धार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक चर्चा

छाता चीनी मिल का मुद्दा अब किसानों और ग्रामीणों की मांग के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। आंदोलनकारी चीनी मिल जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट को मंजूरी देकर औद्योगिक परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।

आने वाले समय में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत, चीनी मिल शुरू करने की समयसीमा और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठने वाले सवाल इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच मांग और समाधान को लेकर अंतर बना हुआ है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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