अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- नदी तंत्र पर विनाशकारी असर, CEC से मांगी रिपोर्ट

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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नदियों के तल से होने वाले अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि नदी तल में रेत खनन का नदी के प्रवाह और पूरे नदी तंत्र पर “विनाशकारी प्रभाव” पड़ता है। अदालत ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति यानी CEC से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर पहले से चल रही सुनवाई

यह मामला सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही से जुड़ा है, जिसका केंद्र राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य और वहां अवैध रेत खनन से जलीय वन्यजीवों को हो रहा नुकसान है। कोर्ट ने मार्च 2026 में इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को कई पर्यावरणीय और निगरानी संबंधी निर्देश दिए गए।

मई और जुलाई के आदेशों में कोर्ट ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, सीसीटीवी और अन्य तकनीकी साधनों के इस्तेमाल, अवैध खनन में लगे वाहनों पर कार्रवाई तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे कदमों पर जोर दिया था।

नदी तल की रेत खनन पर कोर्ट की खास चिंता

6 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन नदी में कथित अवैध रेत खनन का मुद्दा भी आया। अदालत ने कहा कि फिलहाल नदी तल से होने वाले रेत खनन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इससे नदी का प्रवाह प्रभावित होता है और इसका सबसे गंभीर असर नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है।

कोर्ट ने इसी संदर्भ में CEC से नदी तल में रेत खनन की स्थिति पर एक विशेष रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।

राजस्थान, MP और UP से दो सप्ताह में हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को भी निर्देश दिया है कि चंबल घड़ियाल अभयारण्य और उसके आसपास पर्यावरणीय तथा वैधानिक सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर दो सप्ताह के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करें।

इससे पहले कोर्ट ने इन राज्यों को अवैध खनन रोकने के लिए निगरानी, प्रवर्तन और अधिकारियों की जवाबदेही मजबूत करने के निर्देश दिए थे। जुलाई के आदेश में CEC की रिपोर्ट के आधार पर सीसीटीवी, AI आधारित निगरानी, संयुक्त प्रवर्तन दल और अवैध खनन के नेटवर्क पर कार्रवाई जैसे उपायों का भी उल्लेख किया गया था।

डंपर से वन अधिकारी की मौत का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान अवैध खनन रोकने की कार्रवाई में वन अधिकारी की मौत का मुद्दा भी सामने आया। 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने खुद दर्ज किया था कि एक वन अधिकारी को अवैध खनिज ले जा रहे डंपर ने कुचल दिया, जिसके बाद मामले को तत्काल सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया गया था।

इससे पहले अप्रैल में कोर्ट को मध्य प्रदेश के मुरैना में वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की मौत की जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने अवैध खनन से जुड़े हिंसक प्रतिरोध और प्रवर्तन अधिकारियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया था।

अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि संगठित अवैध खनन से निपटने के लिए राज्यों को केवल सामान्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जुलाई के आदेश में अदालत ने संगठित और आदतन अवैध खननकर्ताओं के खिलाफ कानून के तहत निवारक हिरासत जैसे कदमों पर भी विचार करने को कहा था। साथ ही अवैध खनन से होने वाली कमाई के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को संदर्भ भेजने की संभावना भी बताई गई थी।

अदालत ने संयुक्त प्रवर्तन टीमों, बॉडी-वॉर्न कैमरों और GPS आधारित उपकरणों से कार्रवाई की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने जैसे उपायों पर भी जोर दिया था।

CEC की रिपोर्ट पर अब होगी अहम सुनवाई

CEC को 2023 में वैधानिक दर्जा मिला था। यह समिति मूल रूप से 2002 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित हुई थी और पर्यावरण तथा वन मामलों में अदालत की सहायता करती है। चंबल मामले में CEC पहले ही कई सिफारिशें दे चुकी है, जिनमें निगरानी तंत्र मजबूत करना, संयुक्त प्रवर्तन, अवैध खनन पर SOP और नदी तंत्र की वैज्ञानिक निगरानी शामिल हैं।

अब नदी तल से होने वाले रेत खनन पर CEC की रिपोर्ट और तीनों राज्यों के अनुपालन हलफनामे मामले की अगली कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणियों से साफ है कि चंबल से आगे नदी तल में अवैध रेत खनन को व्यापक पर्यावरणीय समस्या के रूप में देखा जा रहा है। अदालत का जोर केवल कार्रवाई पर नहीं, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और नदी पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा पर भी है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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