मामले की तह में जाने पर कई चौंकाने वाली कड़ियाँ सामने आती हैं। इनमें सबसे अहम है अजित पवार का ऐन वक्त पर बदला हुआ ट्रैवल प्लान—जिन्होंने 27 जनवरी को सड़क मार्ग के बजाय मुंबई में ही रुकने का फैसला किया। उस दिन फ्लाइट भी अपने निर्धारित समय सुबह 7 बजे से करीब 70 मिनट की देरी से रवाना हुई। लैंडिंग के दौरान की गई तकनीकी गलतियां और भी गंभीर थीं; आखिरी पलों में अचानक रनवे 29 की जगह रनवे 11 पर स्विच करना और पहली कोशिश नाकाम होने के बावजूद ‘गो-अराउंड’ (दोबारा उड़ान भरने) का प्रयास न करना, सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
शिकायत के मुताबिक, हादसे से ठीक पहले के वे पल बेहद सिहरन पैदा करने वाले थे। कॉकपिट रिकॉर्डिंग में को-पायलट को बदहवास होकर ‘ओह शिट, ओह शिट’ कहते सुना गया, जबकि चीफ पायलट ने रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी। न तो कोई डिस्ट्रेस कॉल की गई और न ही किसी इमरजेंसी प्रोटोकॉल का पालन हुआ। ये तमाम साक्ष्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत नियमों के व्यवस्थित उल्लंघन, गंभीर लापरवाही और एक गहरी आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं। इसी आधार पर अब सभी जिम्मेदार चेहरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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