बिहार की राजनीति का घोड़ा बाज़ार: 5 साल, 17 दलबदलू, और 146 सत्रों का अधूरा हिसाब

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
बिहार चुनावः राज्य में पांच साल में 17 विधायकों ने बदला पाला, विधानसभा के 15 सत्र में केवल 146 बैठकें हुईं

बिहार विधानसभा का पांच साल का लेखा-जोखा: विधायकों के प्रश्न, विधेयक और दल-बदल का खेल

पटना: बिहार विधानसभा के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल का एक विस्तृत विश्लेषण सामने आया है, जो विधायकों की सक्रियता, विधेयक पारित होने की गति और दल-बदल के चलन पर प्रकाश डालता है। ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) और ‘बिहार इलेक्शन वॉच’ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कुल 243 विधायकों ने 22,505 प्रश्न पूछे, जिनमें ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे छाए रहे।

विधायकों के प्रश्नों की बौछार: कौन रहा अव्वल?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अरुण शंकर प्रसाद सबसे अधिक प्रश्न पूछने वाले विधायक रहे, जिन्होंने कुल 275 प्रश्न पूछे। वहीं, कांग्रेस के मनोज प्रसाद सिंह 231 प्रश्नों के साथ दूसरे और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मुकेश कुमार यादव 230 प्रश्नों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। दलवार औसत की बात करें तो, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के विधायकों ने सर्वाधिक सक्रियता दिखाई। सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) और बीजेपी के विधायकों ने भी प्रश्नों की एक बड़ी संख्या दर्ज की।

‘बिहार इलेक्शन वॉच’ के राजीव कुमार ने इस संदर्भ में बताया कि ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर 3,000 से अधिक प्रश्न पूछे गए, जो सीधे तौर पर जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।

विधेयक पारित, पर सत्रों में कमी

पिछले पांच वर्षों (2020-2025) के दौरान, बिहार विधानसभा में कुल 15 सत्र आयोजित हुए, जिनमें केवल 146 बैठकें हुईं। इन सत्रों के दौरान, विधानसभा ने 99 विधेयक पेश किए, और सभी पारित हुए। प्रमुख विधेयकों में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021, बिहार नियंत्रण अपराध विधेयक, 2024, और जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 शामिल हैं।

दल-बदल का चलन और पारदर्शिता के सवाल

रिपोर्ट एक चिंताजनक प्रवृत्ति पर भी प्रकाश डालती है: इन पांच वर्षों के दौरान, 243 विधायकों में से 17 ने अपना दल बदला। राजीव कुमार ने आगे कहा कि हालांकि विधानसभा की पारदर्शिता में सुधार हुआ है और सत्रों की नियमितता बनी रही है, फिर भी कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो पारदर्शिता पर एक प्रश्नचिन्ह लगाता है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version