बिहार की चुनावी सूची: क्या 90.7% वयस्क ही शामिल हैं? चिदंबरम ने उठाए चौंकाने वाले सवाल!
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बिहार की चुनावी मतदाता सूची पर चिंता जताते हुए कई अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह जानने की उत्सुकता जताई है कि क्या राज्य की वयस्क आबादी का सिर्फ 90.7 प्रतिशत ही चुनावी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा पाया है।
चिदंबरम का सीधा सवाल है कि आखिर बिहार की वयस्क आबादी का वह 9.3 प्रतिशत हिस्सा, जो चुनावी सूची से बाहर है, उसके पीछे क्या वजहें हैं? क्या यह बड़ी संख्या में लोग वोट डालने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह जाएंगे?
इसके अलावा, चिदंबरम ने मतदाता सूची में पाई गई गड़बड़ियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने पूछा है कि क्या सूची में लगभग 24,000 ऐसे नाम शामिल हैं, जिनकी पहचान स्पष्ट नहीं है या जिनमें त्रुटियां हैं?
क्या चुनावी सूची में 200,000 से अधिक ऐसे घर या पते हैं जो गलत भरे गए हैं या खाली छोड़ दिए गए हैं? यह सवाल सूची की सटीकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चिदंबरम ने यह भी पूछा है कि क्या मतदाता सूची में लगभग 520,000 नाम डुप्लीकेट यानी एक ही व्यक्ति का नाम कई बार दर्ज है?
इन सभी महत्वपूर्ण सवालों के माध्यम से, पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग से पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद जताते हुए यह आग्रह किया है कि आयोग इन चिंताओं का निवारण करे और देश की सबसे बड़ी आबादी के चुनावी अधिकार को सुनिश्चित करे।
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