‘बीजेपी आयोग’ पर ममता का कड़ा वार, मतुआ बहुल क्षेत्र में SIR के खिलाफ मार्च

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ममता ने मतुआ बहुल क्षेत्र में SIR के खिलाफ मार्च निकाला, चुनाव आयोग पर साधा निशाना, 'बीजेपी आयोग' करार दिया

मुख्यमंत्री की हृदयस्पर्शी अपील: जीवन अनमोल, एसआईआर के भय से आत्महत्या न करें

मुख्यमंत्री ने मानव जीवन के अमूल्य महत्व पर जोर देते हुए लोगों से मार्मिक अपील की है कि वे एसआईआर (National Register of Citizens) के डर से हताश होकर जीवन लीला समाप्त न करें। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर फैली घबराहट और अनिश्चितता के कारण अब तक 35-36 दुखद मौतें हो चुकी हैं। इन त्रासदियों में कई लोगों ने स्वयं को समाप्त कर लिया।

स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े 10 बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को अस्वस्थता के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से तीन की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो गई। उन्होंने कृष्णानगर के एक भयावह मामले का भी जिक्र किया, जहां एक व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या से पहले निर्वाचन आयोग को इस संकट का दोषी ठहराया था। मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी के गठजोड़ की ओर इशारा करते हुए तीखे सवाल दागे कि इन बहुमूल्य जीवनों के चले जाने के लिए कौन जवाबदेह है?

मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में एसआईआर के आयोजन पर भी गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि इन राज्यों का मुख्य लक्ष्य अवैध बांग्लादेशियों को निकालना है, तो वहां एसआईआर आयोजित करने का क्या औचित्य है? ममता बनर्जी ने इस परोक्ष रूप से सवाल उठाया कि क्या यह स्वीकारोक्ति है कि ‘डबल इंजन’ की सरकार वाले राज्यों में भी ‘घुसपैठिए’ मौजूद हैं?

उन्होंने अपने पूर्व के आरोप को दोहराते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत, किसी भी व्यक्ति को विदेशी चिह्नित किए जाने पर उसे तत्काल मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा, “2024 के लोकसभा चुनावों में मतदान करने वाले लोग ही असली मतदाता हैं। यदि वे असली मतदाता नहीं हैं, तो केंद्र सरकार को शासन करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”


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