मतदाता सूची में धांधली का आरोप: बीएलओ की आत्महत्या ने खोला चिट्ठा, क्या लोकतंत्र को लगी सेंध?
देश भर में मतदाता सूची के संधारण को लेकर सिस्टमैटिक वोटर एजुकेशन एंड इलेक्ट्रोरल पार्टिसिपेशन (एसआईआर) लगातार विवादों में है। बिहार के बाद अब 12 राज्यों में जारी इस सूची में हेरफेर के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिनकी गूंज उत्तर प्रदेश के गोंडा तक सुनाई दी है। यहाँ एसआईआर में तैनात एक बीएलओ, विपिन यादव, की आत्महत्या ने पूरे मामले को उजागर कर दिया है, और उनके परिजनों के खुलासे चौंकाने वाले हैं।
दबाव और धमकी: बीएलओ की आत्महत्या के पीछे का सच
विपिन यादव के परिवार का आरोप है कि उन पर पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के मतदाताओं के नाम सूची से काटने का भारी दबाव था। गोंडा में तैनात एसडीएम और लेखपाल कथित तौर पर विपिन यादव से यह काम करवाने के लिए हद दर्जे तक जा रहे थे। परिवार के अनुसार, विपिन यादव द्वारा इस अनैतिक काम को करने से मना करने पर उन्हें नौकरी से निकालने और पुलिस द्वारा उठाए जाने तक की धमकी दी गई। इस मानसिक दबाव और धमकियों से परेशान होकर ही विपिन यादव ने कथित तौर पर आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया।
विपिन यादव के पिता, सुरेश यादव, ने फूट-फूटकर रोते हुए बताया कि मरने से पहले उनके बेटे ने फोन पर कहा था कि अफसर ओबीसी वोटरों के नाम सूची से काटने के लिए उन पर दबाव बना रहे थे। शिक्षक रहे विपिन यादव के पिता ने यह भी बताया कि एसडीएम उन्हें लगातार ओबीसी वोटरों के नाम हटाने की धमकी देते थे, जिसके चलते उनका बेटा बेहद परेशान था।
कांग्रेस का हल्ला बोल: लोकतंत्र पर हमला?
इस हृदय विदारक घटना का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि विपिन यादव की आत्महत्या एसआईआर के पीछे छिपे “असली सच” को उजागर करती है। पार्टी का आरोप है कि “अंदरखाने” यह आदेश दिया गया है कि पिछड़ों, दलितों, वंचितों और विपक्ष समर्थित वोटरों के नाम सूची से काटे जाएं, ताकि बीजेपी के पक्ष में एकतरफा वोटर लिस्ट तैयार की जा सके।
कांग्रेस ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “लोकतंत्र को खत्म करने” का गंभीर आरोप लगाया है, और एसआईआर को इस “साजिश का औजार” बताया है। पार्टी ने भाजपा सरकार से सवाल किया है कि क्या सत्ता की लालसा ने एक “ईमानदार शिक्षक” की जान ले ली? साथ ही, यह भी पूछा गया है कि क्या चुनाव आयोग भी “ओबीसी मताधिकार की हत्या” पर खामोश रहेगा?
यह घटना देश की मतदाता सूची की पवित्रता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और यह समय की मांग है कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषियों को सजा मिले, ताकि लोकतंत्र की नींव को सुरक्षित रखा जा सके।
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