बिहार चुनाव 2025: बड़गांव मामले में माले को झटका, मनोज मंजिल की सजा बरकरार, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी जंग!
पटना: बिहार की राजनीति में चुनावी सरगर्मी के बीच, भोजपुर के बहुचर्चित बड़गांव हत्याकांड मामले में भाकपा-माले को एक बड़ा झटका लगा है। पटना हाईकोर्ट ने पार्टी के पूर्व विधायक मनोज मंजिल की अपील खारिज करते हुए, जिला अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले ने माले को सकते में डाल दिया है, वहीं पार्टी ने इसे “राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय” करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख: अपील खारिज, सजा बहाल
बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने बड़गांव हत्याकांड के मामले में अपने फैसले से पूर्व विधायक मनोज मंजिल को राहत देने से इनकार कर दिया। जिला अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए दायर की गई उनकी अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी सजा बरकरार हो गई है
माले का गंभीर आरोप: “राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला”
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल ने तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव का परिणाम है। कुणाल ने आरोप लगाया कि मनोज मंजिल और उनके साथियों को जानबूझकर इस मामले में फंसाया गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिस व्यक्ति की हत्या का आरोप है, उसकी लाश तक बरामद नहीं हुई थी, ऐसे में सजा देना सवालों के घेरे में है।
सुप्रीम कोर्ट में अंतिम उम्मीद: माले करेगी कानूनी लड़ाई
कुणाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भाकपा-माले इस फैसले को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि वे “गरीबों के नेताओं के खिलाफ हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं और लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करें।”
बिहार विधानसभा चुनावों के नजदीक आने के साथ, यह फैसला भाकपा-माले के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
भाकपा-माले नेता मनोज मंजिल को पटना हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सजा बरकरार
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