नजफगढ़ में हिमांशु भाऊ गैंग के दो सदस्य प्रतिद्वंद्वी पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार

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delhi two members of himanshu bhau gang arrested for firing at rival in najafgarh

गैंगस्टर रोहित लांबा पर गोलीबारी: हिमांशु भाऊ गिरोह के दो शार्पशूटर दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में गैंगस्टर रोहित लांबा पर गोलीबारी करने के आरोप में हिमांशु भाऊ गिरोह के दो कथित शार्पशूटरों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कई घंटों की मशक्कत के बाद अंकित अहेरिया और निखिल दुबे को पकड़ा गया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

आरोपियों की पहचान 27 वर्षीय मनीष उर्फ मोनी और 22 वर्षीय हिमांशु के रूप में हुई है। मनीष दिचाऊं कलां का रहने वाला है, जबकि हिमांशु उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का निवासी है। दोनों ने गैंगस्टर हिमांशु भाऊ, नवीन बाली और एक अन्य अज्ञात अपराधी के निर्देश पर 28 अक्टूबर को हिस्ट्रीशीटर रोहित लांबा पर गोलियां चलाईं, जिससे वह घायल हो गया था।

सोशल मीडिया से जुड़ाव और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

दोनों आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए भाऊ से संपर्क साधा था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, मनीष 12वीं तक पढ़ा हुआ है और एसी मैकेनिक का काम करता है, वहीं हिमांशु द्वारका में कंप्यूटर कोर्स कर रहा है।

गैंगवार का नतीजा: लांबा पर हमला क्यों?

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि लांबा की दुश्मनी हरियाणा के झज्जर जेल में बंद एक अन्य अपराधी दीपक से थी। जेल में हुई एक कहासुनी के बाद दोनों के बीच गैंगवार शुरू हो गई थी। जेल से रिहा होने के बाद, दीपक ने भाऊ के साथ मिलकर लांबा को खत्म करने की योजना बनाई। 28 अक्टूबर को, जब लांबा नजफगढ़ में अपने दोस्त के साथ सिगरेट पी रहा था, तब एक एसयूवी में सवार तीन-चार लोगों ने उस पर गोलियां बरसा दीं। इस पूरी घटना को सीसीटीवी कैमरों में कैद कर लिया गया था।

दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी

घटना के दो दिन बाद, 30 अक्टूबर को, पुलिस ने उत्तराखंड के मसूरी की ओर जा रहे दो अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया और उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए। पुलिस का कहना है कि दीपक ने ही हिमांशु और मनीष को घटना के लिए एसयूवी किराए पर लेने को कहा था, साथ ही लांबा की तस्वीर देकर काम पूरा होने पर इनाम का वादा भी किया था। घटना के बाद, ये दोनों आरोपी बापरोला-मुंडका मार्ग से बहादुरगढ़ भागे और फिर मसूरी की ओर चले गए।


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