जम्मू-कश्मीर: सुरक्षा कवच की अभेद्य दीवार
जम्मू और कश्मीर, भारत का मुकुटमणि, आज एक नए सिरे से सुरक्षा के ताने-बाने से बुना जा रहा है। यहाँ सेना, सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस का संयुक्त अथक प्रयास, आतंकवाद की जड़ों को समूल नष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख रहा है। यह त्रयी न केवल आतंकवादियों को उनके सक्रिय समर्थकों (ओजीडब्ल्यू) और पृष्ठभूमि में काम करने वाले षड्यंत्रकारियों के साथ निशाना बना रही है, बल्कि इस नापाक गठजोड़ को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए एक निर्णायक युद्ध छेड़ चुकी है।
नियंत्रण रेखा (एलओसी) की सुरक्षा का दारोमदार जहां वीर सेना के कंधों पर है, वहीं सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) की चौकसी में अपनी अटूट निष्ठा का परिचय दे रहा है। ये दोनों ही बल, अपनी-अपनी सीमाओं में, देश की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हैं।
नियंत्रण रेखा, 740 किलोमीटर के अपने विशाल विस्तार के साथ, कश्मीर घाटी के बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों और जम्मू जिले के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है। यह एक संवेदनशील मोर्चा है, जहां हर पल चौकन्ना रहना आवश्यक है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय सीमा, 240 किलोमीटर लंबी, जम्मू संभाग के जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों को कवर करती है। यह भी एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ से राष्ट्र की सुरक्षा को लगातार चुनौती मिलती रहती है।
यह संयुक्त प्रयास, इन महत्वपूर्ण सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ, केंद्र शासित प्रदेश को आतंकवाद के साए से मुक्त कराने की दिशा में एक साहसिक कदम है। सेना, सुरक्षा बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस मिलकर, एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रहे हैं जहाँ जम्मू और कश्मीर अमन और समृद्धि का पर्याय बनेगा।
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