इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख से दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग, उड़ानों पर असर!
इथियोपिया के हायली गुब्बी ज्वालामुखी के विनाशकारी विस्फोट की गूंज अब भारत तक पहुंच गई है। ज्वालामुखी से निकले राख के विशाल बादल ने दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसके परिणामस्वरूप स्मॉग में वृद्धि हुई है और कई उड़ानों को रद्द या उनके रूट बदलने पड़े हैं।
दिल्ली की हवा हुई जहरीली, दृश्यता हुई प्रभावित:
रविवार और सोमवार को दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसके चलते सुबह और शाम के समय दृश्यता काफी कम हो गई है और जहरीला स्मॉग छा गया है। मौसम विभाग के अनुसार, ऊपरी हवा में मौजूद राख सूर्य की किरणों को अवरुद्ध कर रही है, जिससे आसमान सामान्य से अधिक धुंधला दिखाई दे रहा है।
उड़ानों का गणित गड़बड़ाया:
ज्वालामुखी की राख हवाई यात्रा के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होती है, क्योंकि यह विमान के इंजनों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसी खतरे को भांपते हुए, भारत की कई प्रमुख एयरलाइंस ने सावधानी बरतते हुए अपने उड़ान मार्गों में बदलाव किया है। अकासा एयर, इंडिगो और KLM जैसी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी एयरलाइंस को निर्देश जारी किए हैं कि वे राख वाले क्षेत्रों और उच्च ऊंचाइयों से बचते हुए उड़ान भरें। साथ ही, इंजनों की सघन जांच और वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह भी दी गई है।
एयरलाइंस की प्रतिक्रिया:
इंडिगो ने सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि उनकी टीमें अंतरराष्ट्रीय उड्डयन एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रही हैं और सभी एहतियाती कदम उठाने को तैयार हैं। एयर इंडिया भी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और अपने परिचालन दल को लगातार अपडेट भेज रही है। फिलहाल उड़ानों पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मार्ग परिवर्तन किए जाएंगे और यात्रियों को सूचित करने के लिए ग्राउंड टीमें सक्रिय हैं।
10,000 साल बाद फटा ज्वालामुखी:
इथियोपिया का यह ज्वालामुखी लगभग 10,000 वर्षों के अंतराल के बाद फटा है। इसका विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख का गुबार 10 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। इस राख में ज्वालामुखीय राख, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और कांच व चट्टानों के अत्यंत महीन कण शामिल हैं, जो उड़ानों और ऊपरी वायुमंडल के लिए बेहद हानिकारक हैं।
भारत तक राख के बादल का सफर:
वैज्ञानिकों के अनुसार, ज्वालामुखी से निकली राख का विशाल बादल 100-120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा है। यह बादल पहले गुजरात पहुंचा, फिर राजस्थान से होते हुए हरियाणा, दिल्ली और पंजाब तक फैल गया है, और अब उत्तर भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह प्रभाव कुछ समय तक बना रह सकता है, हालांकि इसका मुख्य असर ऊपरी हवाओं में ही दिखाई देगा। जमीन स्तर पर वायु गुणवत्ता में गिरावट सीमित हो सकती है, लेकिन पहले से ही खराब स्थितियां और बिगड़ सकती हैं।
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