सरकारी योजनाओं में धांधली का खेल: सीएजी की रिपोर्टें और एक रहस्यमयी पैटर्न
केंद्र सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं, जो गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए बनाई गई हैं, धांधली और घपलेबाजी के आरोपों से घिरी हुई हैं। यह कोई एक-दो योजनाओं की बात नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या का संकेत है। हाल ही में, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्टों ने आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है।
सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि योजना के लाभार्थियों की मृत्यु और उनके नाम पर जारी हुए धन के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया है। सोचिए, 7,49,820 लाभार्थियों के मोबाइल नंबर गलत दर्ज थे, जिनमें से कई जगहों पर तो “9999999999” जैसा अवास्तविक नंबर डाला गया था। इसके अलावा, लाभार्थियों के नाम, जन्मतिथि जैसी बुनियादी जानकारी में भी भारी गड़बड़ियां पाई गईं, जो योजना के कार्यान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं।
यह समस्या सिर्फ आयुष्मान भारत तक सीमित नहीं है। सौभाग्य, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी अन्य प्रमुख योजनाओं में भी सीएजी ने इसी तरह की धांधली की ओर इशारा किया है। यह एक ऐसा पैटर्न है जो सरकारी तंत्र में गहरी जड़ें जमा चुका लगता है।
नवंबर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि चुनाव आयोग के पास एक ‘डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर’ मौजूद है, जो एक ही फोटो, पते या एपिक नंबर के बार-बार इस्तेमाल को आसानी से पकड़ सकता है। लेकिन, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनाव आयोग इस महत्वपूर्ण उपकरण का उपयोग नहीं कर रहा है।
सवाल यह उठता है कि क्या कौशल विकास मंत्रालय या अन्य संबंधित सरकारी विभागों के पास ऐसे ही ‘डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर’ मौजूद हैं? क्या यह संभव है कि एक ही तरह की धांधली की पुनरावृत्ति विभिन्न विभागों में हो रही हो? या फिर, इन सभी अनियमितताओं के तार किसी एक केंद्रीय बिंदु से जुड़े हुए हैं, जो इस सुनियोजित खेल को संचालित कर रहा है? यह एक गहरा रहस्य है, जिसकी परतें खोलना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
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