झारखंड में छात्र आंदोलन को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को छात्रों की चिंता है तो बिहार में चल रहे आंदोलनों और अभ्यर्थियों की मांगों पर भी ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
सम्राट चौधरी के बयान से शुरू हुआ विवाद
झारखंड में JPSC-JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित कार्रवाई को लेकर विपक्ष पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि छात्रों के समर्थन को लेकर विपक्ष की चुप्पी उसके ‘छात्र हितैषी’ होने के दावे पर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस ने बिहार सरकार को घेरा
सम्राट चौधरी के बयान पर बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने मंगलवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वास्तव में छात्रों को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें बिहार में हुए छात्र आंदोलनों पर भी चिंता व्यक्त करनी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित गोलीबारी, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और बिहार में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा।
‘अपने राज्य के छात्रों की भी सुनें’
स्नेहाशीष वर्धन ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सचिवालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर पीएचडी अभ्यर्थी बिहार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 के विरोध में आमरण अनशन कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई दिनों से आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि अभ्यर्थियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा है। कांग्रेस ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया।
झारखंड में छात्रों के समर्थन का दावा
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड में पार्टी छात्रों के समर्थन में खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन सरकार छात्रों के साथ बातचीत कर रही है और उनकी मांगों को समझने की कोशिश की जा रही है।
उनके मुताबिक, कांग्रेस आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति सहानुभूति रखती है और उनके मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए चाहती है।
आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत
छात्र आंदोलनों को लेकर बिहार और झारखंड की राजनीति में अब बयानबाजी तेज होती दिख रही है। एक तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठा रहा है, वहीं कांग्रेस बिहार सरकार के अपने राज्य में छात्र और अभ्यर्थी आंदोलनों को लेकर जवाब मांग रही है।
ऐसे में छात्र हित अब सिर्फ रोजगार और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह दोनों राज्यों में राजनीतिक बहस का भी केंद्र बनता जा रहा है।
आगे क्या?
JPSC-JSSC से जुड़े छात्रों की मांगों और बिहार में विभिन्न अभ्यर्थी आंदोलनों पर सरकारों का रुख आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा। राजनीतिक दलों के आरोपों के बीच छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान बातचीत और पारदर्शी प्रक्रिया से होना सबसे अहम है।
सियासत चाहे बिहार की हो या झारखंड की, छात्रों की मांगों का जवाब राजनीतिक आरोपों से नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई और संवाद से मिलना चाहिए। यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


