“कंगाली की मार, ईरान लाचार!” ट्रंप का दावा- होर्मुज खोलने को तैयार हुआ दुश्मन, बोले- ‘पैसा नहीं आ रहा, इसलिए मर रहे’

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मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच पिछले छह महीनों से बारूद की गंध घुली हुई है। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा कर वैश्विक राजनीति में सनसनी फैला दी है। पीटीआई के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि ईरान अब रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को फिर से खोलने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। ट्रंप ने इसके पीछे ईरान की चरमराती आर्थिक स्थिति को मुख्य वजह बताया है।

ट्रंप का तीखा प्रहार: ‘उनके पास धेला भी नहीं बचा’

शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने ईरान की हालत पर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान अब तत्काल प्रभाव से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना चाहता है। ट्रंप के शब्दों में, “वे आर्थिक रूप से दम तोड़ रहे हैं, क्योंकि उनके पास अब कोई पैसा नहीं आ रहा है।” राष्ट्रपति के मुताबिक, ईरान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन इसी जलमार्ग से जुड़ी है और इसके बंद होने से उसे अपूरणीय वित्तीय क्षति हो रही है।

इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी: ट्रंप की ‘स्टील की दीवार’

ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान ने शुरुआत में दुनिया को संकट में डालने के लिए इस जलडमरूमध्य को बंद करने का दुस्साहस किया था। लेकिन अमेरिका ने इसका जवाब “सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी” से दिया। ट्रंप ने इसे ‘स्टील की दीवार’ करार देते हुए कहा कि इस सख्त घेराबंदी ने ईरान के राजस्व के सारे रास्ते बंद कर दिए, जिससे तेहरान घुटनों पर आ गया है।

ठुकराया गया ईरान का ‘समझौता प्रस्ताव’

व्हाइट हाउस से रवानगी के दौरान ट्रंप ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप का दावा है कि ईरान अब एक ऐसा सौदा करने को बेताब है, जिसके तहत यह महत्वपूर्ण जलमार्ग तुरंत खुल जाए और उन्हें आर्थिक राहत मिले।

‘भारी नुकसान में ईरान, अब समझौते की तलाश’

ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान की जल्दबाजी का एकमात्र कारण उसका भारी वित्तीय नुकसान है। तेहरान की अब यह कोशिश है कि होर्मुज को खोलने के बदले वह अमेरिका के साथ किसी तरह की डील फिक्स कर ले, जिससे उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके।

पर्दे के पीछे की बातचीत: रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच एक संभावित समझौते पर चर्चा चल रही थी। इस योजना के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के बदले में अमेरिका, ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई कड़ी समुद्री नाकाबंदी में ढील देने पर विचार कर सकता था।

आखिर क्यों सुलग रहा है होर्मुज का मुद्दा?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने कड़े आर्थिक और समुद्री प्रतिबंध लागू किए हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इन सख्त कदमों का मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों पर हमले करने से रोकना और उसे बातचीत की मेज पर लाना है।

चेतावनी: क्या फिर शुरू होगी बमबारी?

खतरा अभी टला नहीं है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी संभावनाएं हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) संपन्न होने के बाद ईरान के खिलाफ अपना बमबारी अभियान फिर से शुरू कर सकते हैं। इस कयास ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।

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