गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संकाय का भव्य कायाकल्प, अब बनेंगे १२ विभाग
पुनर्गठन से बहु-विषयक और आधुनिक बनेगा संकाय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मिलेगा बल
गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) ने अकादमिक और प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। विश्वविद्यालय की कुलाधिपति ने अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय से संबंधित परिनियम में संशोधन प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह महत्वपूर्ण संशोधन विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्य परिषद की अनुसंशाओं के आधार पर शासन को भेजा गया था।
संकाय का बहु-विषयक रूपांतरण:
नए संशोधित परिनियम के अनुसार, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय को अब एक व्यापक और आधुनिक बहु-विषयक स्वरूप प्रदान किया गया है। पूर्व में, इस संकाय में केवल चार विभाग कार्यरत थे: मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग तथा एप्लाइड साइंसेज। अब, इसे दो प्रमुख संस्थानों में पुनर्गठित किया गया है:
- इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET): इसके अंतर्गत अब सात विभाग होंगे, जिनमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
- इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी: यह संस्थान पहली बार संकाय का एक अभिन्न अंग बना है, जिसमें पाँच विभाग होंगे: फार्मास्यूटिक्स, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री एंड एनालिसिस, फार्माकोलॉजी, फार्माकॉग्नोसी तथा फार्मेसी प्रैक्टिस।
इस पुनर्गठन से विभागों की कुल संख्या चार से बढ़कर बारह हो गई है। यह परिवर्तन न केवल आधुनिक विषयों को शामिल करता है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहु-विषयक दृष्टिकोण को भी प्रभावी ढंग से साकार करता है। विशेष रूप से, फार्मेसी को एक स्वतंत्र संस्थान के रूप में स्थापित करना और इसे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के मानकों के अनुरूप बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है।
बोर्ड ऑफ फैकल्टी की संरचना में भी बड़े बदलाव:
इन परिवर्तनों के साथ-साथ, बोर्ड ऑफ फैकल्टी की संरचना में भी एक व्यापक फेरबदल किया गया है। पूर्व में सीमित संरचना में केवल डीन, विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर शामिल थे। नई, अधिक समावेशी संरचना में अब डीन, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के निदेशक, दोनों संस्थानों के सभी प्रोफेसर, विभिन्न विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानविकी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रत्येक विभाग से एक एसोसिएट प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर (वरिष्ठता के आधार पर रोटेशन), मानविकी के दो शिक्षक तथा इंजीनियरिंग और फार्मेसी विषयों से संबंधित बाहरी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
यह नई संरचना आंतरिक, बाहरी और बहु-विषयक विशेषज्ञता पर आधारित है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, AICTE और PCI के मानकों के अनुरूप है। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को भविष्योन्मुखी, नवाचार-प्रेरित और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुकूल बनाना, बहु-विषयक शिक्षण को बढ़ावा देना तथा तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाना है। इसके माध्यम से, उच्च-स्तरीय शिक्षकों, विशेषज्ञों और बाहरी विचारों को विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जा सकेगा।
कुलपति ने जताई प्रसन्नता, भविष्य की ओर एक बड़ा कदम:
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “यह संशोधन विश्वविद्यालय के तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा तंत्र को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। नए विभागों और समावेशी बोर्ड ऑफ फैकल्टी संरचना के माध्यम से शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, उद्योग सहयोग तथा रोजगारपरक शिक्षण को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह कदम विश्वविद्यालय को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करेगा।”
संशोधनों के बाद, विश्वविद्यालय अब नए पाठ्यक्रमों के विकास, बोर्ड ऑफ स्टडीज के गठन, उद्योग साझेदारी और शोध विस्तार की दिशा में तेजी से कार्य करेगा। इन परिवर्तनों के माध्यम से, विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक सशक्त शैक्षणिक ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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