लखनऊ की सड़कों पर रेंगता ट्रैफिक! ई-रिक्शा की बाढ़ पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार को चार हफ्ते का अल्टीमेटम
लखनऊ, दो नवंबर: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी समेत पूरे प्रदेश में बेकाबू होते ई-रिक्शा और उससे लगने वाले भीषण जाम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को एक अहम आदेश में अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले चार सप्ताह के भीतर यह तय करे कि जिन शहरों में ई-रिक्शा की संख्या जरूरत से ज्यादा हो चुकी है, वहां इनके नए पंजीकरण पर रोक लगाई जाए या नहीं।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति ए. के. चौधरी की पीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह बिसेन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। अदालत के संज्ञान में लाया गया कि अकेले लखनऊ में ही इस समय लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिसके चलते यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और जगह-जगह भारी जाम की समस्या पैदा हो गई है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सरकार से कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन क्षेत्रों में ई-रिक्शा के नए पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए, जहां इनकी तादाद क्षमता से अधिक हो गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा पंजीकरण शुल्क में दी गई छूट का कतई यह अर्थ नहीं है कि सड़कों पर ई-रिक्शा चलाने के लिए कानूनी तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं है। मोटर वाहन नियम, 1998 के नियम 178 का हवाला देते हुए अदालत ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार के पास ई-रिक्शा के संचालन को पूरी तरह नियंत्रित करने का विधिक अधिकार है।
पीठ ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि 12 मई, 2022 को जारी एक आदेश के जरिए लखनऊ की कई प्रमुख सड़कों पर ई-रिक्शा के प्रवेश पर पहले से प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन जमीन पर इन नियमों का पालन सख्ती से नहीं कराया जा रहा है। अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को यह सख्त निर्देश दिया कि वह मौजूदा प्रतिबंधों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे और जरूरत पड़ने पर अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी ऐसे ही प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं को तलाशे। हालांकि, अदालत ने यह भी हिदायत दी कि जहां कहीं भी प्रतिबंध लगाए जाएं, वहां आम यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पहले से वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराए जाएं।
मामلے की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है और इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कामता चौराहे और पॉलिटेक्निक-कामता-चिनहट मार्ग पर आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम का कोई स्थायी समाधान निकालने पर भी जोर दिया।
अदालत को अवगत कराया गया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-बीएचयू, वाराणसी की टीम विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाले वाहनों के मूवमेंट का एक स्वतंत्र आकलन करेगी। यह संस्था यातायात की स्थिति का कंप्यूटर आधारित अध्ययन कर इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करेगी, जिसके तहत तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्ताव भी बनाए जाएंगे।
इसके अलावा, पीठ ने इस मामले के मद्देनजर गठित समिति के प्रस्तावों और लखनऊ नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा का सिलसिला भी जारी रखा। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को आपसी बेहतर तालमेल के साथ काम करने और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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