‘ऑपरेशन सिंदूर’: जब हवा में गूंजी न्याय की पुकार
नई दिल्ली: "क्या आपने एक भी तस्वीर देखी है जहाँ हमारे किसी एयरबेस पर कुछ गिरा हो, हमें कोई टक्कर लगी हो, कोई हैंगर तबाह हुआ हो या ऐसा कुछ?" यह सवाल एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सीधे तौर पर उन लोगों से पूछा, जो भारत की सैन्य शक्ति पर संदेह करते हैं। उन्होंने आगे कहा, "हमने उन्हें उनकी जगहों की इतनी सारी तस्वीरें दिखाईं, लेकिन वे हमें एक भी तस्वीर नहीं दिखा पाए, तो उनकी कहानी ‘मनोहर कहानियां’ है। उन्हें खुश रहने दीजिए। आखिरकार, उन्हें भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अपनी जनता को कुछ तो दिखाना ही है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
ऑपरेशन सिंदूर: एक निर्णायक कदम
एयर चीफ मार्शल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "ऑपरेशन सिंदूर सबसे महत्वपूर्ण था।" उन्होंने उस घटना का जिक्र किया जिसने इस साहसिक कार्रवाई को जन्म दिया: "पहलगाम की घटना के बाद, हमने यह तय किया कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए की सजा मिलनी चाहिए और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, भारतीय सशस्त्र बलों को एक स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था, जिसमें भारतीय वायुसेना को आतंकवादी शिविरों से जुड़े नौ में से दो प्रमुख लक्ष्यों को निशाना बनाने में एक प्रमुख भूमिका सौंपी गई थी। यह ऑपरेशन न केवल एक सैन्य अभियान था, बल्कि न्याय की उस पुकार का प्रतीक था, जो हमारे वीर जवानों ने उन लोगों के खिलाफ उठाई थी जिन्होंने मासूमों का खून बहाया था।
(आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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