खनिज संपदा के मामले में धनी झारखंड में अब इनके बेहतर इस्तेमाल, बंद पड़ी खदानों को दोबारा गुलजार करने और अवैध खनन की कमर तोड़ने के लिए राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गत तीन जून 2026 को हुई खान एवं भूतत्व विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खनन क्षेत्र को लेकर कई कड़े और दूरदर्शी निर्देश दिए गए थे। इन महत्वपूर्ण निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए अब खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने छह नवंबर को सभी जिलों के उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, वन प्रमंडल पदाधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को युद्धस्तर पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। साथ ही, इन सभी से त्वरित अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की गई है।
बंद खदानों का आवंटन रद्द कर फिर होगी नीलामी
समीक्षा बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया था कि राज्य में कुल 165 कोयला खनन पट्टे आवंटित हैं, जिनमें से 103 तो सुचारू रूप से कार्यरत हैं, लेकिन लगभग 62 खदानें पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इनमें से 58 खनन पट्टे अकेले बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल जैसी बड़ी कंपनियों के पास हैं, जबकि शेष चार पट्टे सेल, टाटा स्टील, हिंडाल्को और अरन्या माइंस प्राइवेट Limited को मिले हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इन बंद खदानों की नए सिरे से समीक्षा की जाए। जिन मामलों में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और वन विभाग की मंजूरी मिलने के बावजूद खनन कार्य शुरू नहीं हुआ है, उनका आवंटन बिना किसी देरी के नियमानुसार रद्द कर दिया जाए और उनकी नए सिरे से नीलामी की जाए।
लौह अयस्क समेत 49 बंद खनन पट्टों पर होगी कार्रवाई
सिर्फ कोयला ही नहीं, बल्कि राज्य में लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर और ग्रेफाइट जैसी बेशकीमती संपदा से जुड़े 49 अन्य खनन पट्टे भी ताले के अंदर बंद हैं। सरकार ने इन तमाम बंद खदानों के मामलों की भी गहराई से समीक्षा करने को कहा है। जिन पट्टाधारियों ने तमाम जरूरी स्वीकृतियां मिलने और जमीन अपने नाम होने के बावजूद खनन गतिविधियों को ठप रखा है, उनके लाइसेंस रद्द करते हुए उन खदानों को भी री-ऑक्शन (पुनः नीलामी) के दायरे में लाने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।
बंद वृहद खनिज पट्टों की भी होगी समीक्षा
कोयले और अन्य खनिजों जैसे लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, ग्रेफाइट, तांबा, यूरेनियम, क्यानाइट, सोना और मैंगनीज के कुल मिलाकर करीब 85 खनन पट्टे राज्य में आवंटित हैं। इनमें से 36 ही संचालित हो रहे हैं जबकि 49 खदानें वीरान पड़ी हैं। इन सभी की कुंडली खंगालकर नियमानुसार सख्त कार्रवाई का हुक्म दिया गया है। इसके अलावा, जो खनन पट्टे अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं या लैप्स हो चुके हैं, उनकी एक मुकम्मल सूची तैयार कर तत्काल प्रभाव से री-ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। इतना ही नहीं, स्वर्ण (गोल्ड) ब्लॉकों के नए सिरे से अन्वेषण और उनकी नीलामी की संभावनाएं तलाशने के साथ-साथ, राजकीय राजस्व के बड़े हित में लौह अयस्क के उठाव के लिए एक नया और प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
बालू घाटों की नीलामी और अवैध उठाव पर सख्ती
पर्यावरण और राजस्व दोनों दृष्टियों से संवेदनशील माने जाने वाले बालू घाटों को लेकर भी सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। राज्य के कुल 444 बालू घाटों में से 300 की नीलामी प्रक्रिया सफलताપૂર્વक पूरी की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने बचे हुए सभी घाटों की नीलामी प्रक्रिया को जल्द से जल्द मुकाम तक पहुंचाने और नीलाम हो चुके तमाम घाटों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत सभी संबंधित महकमों को आपसी तालमेल के साथ सहयोग करने को कहा गया है। अवैध ढुलाई पर लगाम कसने के लिए बालू घाटों और मुख्य निकासी मार्गों पर सुरक्षा की दृष्टि से आधुनिक चेकनाका बनाने और सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अवैध खनन रोकने में तकनीक का इस्तेमाल
कोयला और दूसरे तमाम खनिजों के अवैध खनन, गैर-कानूनी परिवहन और संदिग्ध भंडारण पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए राज्य स्तर पर और जिला खनन टास्क फोर्स को अत्यधिक सक्रिय कर दिया गया है। अवैध खनन और बालू की चोरी पर पैनी नजर रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था का जाल बिछाया जा रहा है। साथ ही, यह भी कड़ाई से निर्देशित किया गया है कि नीलामी के बाद तय वक्त सीमा बीत जाने के बावजूद जिन पट्टाधारियों ने वैधानिक मंजूरियां हासिल नहीं की हैं और जिनकी खदानें आज भी ठप पड़ी हैं, उनके वीईआर (Value of Extracted Mineral / वैध अनुमानित राजस्व) का नए सिरे से निर्धारण करते हुए उन खदानों को भी तत्काल प्रभाव से दोबारा नीलाम किया जाए।
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