खौफनाक मंज़र: फँसे यात्री, बेबस जान!
प्रारंभिक पड़ताल ने जो तस्वीर पेश की है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बस में कोई आपातकालीन निकास नहीं था, और तो और, जान बचाने के लिए खिड़की के शीशे तोड़ने वाले हथौड़े भी नदारद थे। यात्रियों के लिए एक संकरा गलियारा था, जिसमें वे असहाय होकर फँस गए। जैसे ही बिजली के तारों में आग भड़की, स्वचालित दरवाजा-लॉक सिस्टम हरकत में आ गया, और निकास का एकमात्र रास्ता भी बंद हो गया।
जानकारी के अनुसार, बस के अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था। कई शव एक-दूसरे के ऊपर पड़े मिले। इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले 19 लोगों की शिनाख्त के लिए सभी शवों को डीएनए परीक्षण के लिए जोधपुर भेजा गया है। घायलों में दो मासूम बच्चे और चार महिलाएं शामिल हैं, जिनमें से कई 70 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। सभी को तत्काल जैसलमेर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जोधपुर रेफर कर दिया गया।
जैसे ही इस भीषण दुर्घटना की खबर फैली, जैसलमेर के जिला कलेक्टर प्रताप सिंह नाथावत ने तुरंत बचाव अभियान शुरू करने का आदेश दिया। उन्होंने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, “सभी 19 शवों को डीएनए आधारित पहचान के लिए जोधपुर भेज दिया गया है।”
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