श्रम संहिताओं पर गरमाई राजनीति: उदित राज का कड़ा विरोध, सरकार के दावों पर सवाल
केंद्र सरकार द्वारा 2020 से लंबित चार नई श्रम संहिताओं को 21 नवंबर से लागू करने के फैसले ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। कांग्रेस नेता उदित राज ने इन संहिताओं को “मजदूर विरोधी” करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि ये संहिताएँ श्रमिकों के हित में हैं, जिनमें न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं, यहां तक कि गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए भी।
नई श्रम संहिताओं के लागू होने से अब काम के घंटों में वृद्धि, निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा और नियोक्ताओं के लिए छंटनी के नियमों में ढील मिलने की संभावना है। यह स्थिति उन लाखों श्रमिकों के लिए चिंता का विषय है जो इन संहिताओं के दायरे में आएंगे।
‘प्लेटफॉर्म वर्क’ को एक नई रोजगार व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया गया है, जहाँ व्यक्ति डिजिटल मंचों के माध्यम से ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। उदित राज का मानना है कि नई संहिताओं से इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति और भी खराब हो सकती है।
पीटीआई के इनपुट के साथ यह रिपोर्ट श्रमिकों के अधिकारों और सरकार की नीतियों पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ती है।
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