बिहार में NDA को बड़ा झटका: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने छोड़ा साथ, 153 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार
बिहार में चुनावी बिसात बिछने से पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को एक बड़ा झटका लगा है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने सीट बंटवारे में अपनी उपेक्षा से नाराज होकर गठबंधन से अलग होने का फैसला किया है। पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर को एक भी सीट न मिलने से गहरा आघात पहुंचा है और अब वे अकेले ही 153 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।
डिप्टी सीएम से मुलाकात, पर बात न बनी
सीट बंटवारे में अपना हक सुनिश्चित करने के लिए ओपी राजभर ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की थी। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई थी जब ब्रजेश पाठक, राजभर के अस्वस्थ होने पर उनसे मिलने अस्पताल भी गए थे। दोनों नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। इस असफलता के बाद, राजभर ने बागी तेवर अपना लिए।
राजभर का दर्द, ‘वोट बैंक हमारा, सीट हमारी नहीं?’
ओपी राजभर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिहार में प्रजापति, राजभर और राजबंशी जाति की लगभग 20 हजार से 80 हजार तक वोट है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) जैसी पार्टियां इन वोटों को अपना बताती हैं, लेकिन जब सीटों की बात आती है तो उनकी पार्टी को कोई तवज्जो नहीं दी जाती। राजभर ने यह भी कहा कि जब उपचुनावों में इन पार्टियों को मदद की जरूरत थी, तब वे गिड़गिड़ा रहे थे।
उन्होंने याद दिलाया कि बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल मदद की गुहार लगा रहे थे। राजभर के अनुसार, भाजपा नेता चुनाव आने पर साथ मिलकर लड़ने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इन नेताओं पर भरोसा किया और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई बड़े नेताओं से बात की, जिन्होंने उन्हें सीट देने का आश्वासन दिया था।
नया मोर्चा, नई राह
राजभर ने स्पष्ट किया कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने के लिए अन्य दलों और नेताओं से बातचीत कर रही है। वे प्रेमचंद प्रजापति और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर एक नया मोर्चा बनाने पर विचार कर रहे हैं। इस मोर्चे के तहत, पार्टी बिहार की 153 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
अन्य नेताओं का क्या होगा?
इस बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के खाते में कौन-कौन सी सीटें आई हैं, जैसा कि पहले खबर थी। राजभर के इस कदम से बिहार के राजनीतिक समीकरणों में निश्चित रूप से कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
