उत्तर बंगाल के चाय बागानों पर आफत: भारी बारिश और बाढ़ ने उजाड़ी फसलें, इंडस्ट्री ने मांगी सरकारी मदद

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
बाढ़ और बारिश से चाय बगान बुरी तरह प्रभावित.

उत्तर बंगाल के चाय बागानों पर आसमानी आफत: बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का तांडव, उद्योग पर छाया संकट

उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, विकराल बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन ने चाय उद्योग की कमर तोड़ दी है। कई कीमती चाय बागानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं, वर्षों से निर्मित बुनियादी ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया है, और हज़ारों मेहनती श्रमिकों के रोज़गार पर अस्तित्व का संकट आ खड़ा हुआ है। इस भयावह तबाही के बीच, चाय उद्योग ने सरकार से तत्काल राहत और सहायता पहुँचाने की गुहार लगाई है।

मेचपारा चाय बागान: बाढ़ का सबसे वीभत्स चेहरा

इस तबाही का सबसे खौफनाक मंजर मेचपारा चाय बागान में देखने को मिला है। बाढ़ के उफनते पानी ने लगभग 2,000 चाय की झाड़ियों को निगल लिया और 30 हेक्टेयर उपजाऊ बागान भूमि को तहस-नहस कर दिया। 30 फुट ऊंचा तटबंध, 100 फुट लंबी महत्वपूर्ण सड़क और तीन पुलिया पूरी तरह से धराशायी हो गईं, जिससे बागान के अंदर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। इस बागान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 6,000 से ज़्यादा मज़दूरों का जीवन टिका हुआ है, जो अब अनिश्चितता के अंधेरे में जी रहे हैं।

नागराकाटा बागान: फैक्ट्री की दीवार ढही, प्रसंस्कृत चाय बह गई

नागराकाटा चाय बागान की हालत भी कुछ कम गंभीर नहीं है। बाढ़ के सैलाब ने 30 फुट ऊंची फैक्ट्री की दीवार को ध्वस्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 10,000 किलोग्राम तैयार चाय का कीमती माल पानी में बह गया। दक्षिण सुखनबरी डिवीजन में लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया। स्थानीय पैदल पुल और सड़क भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए, जिससे लगभग 8,000 निवासियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।

कुर्ती और चेंगमारी बागानों की दयनीय स्थिति

कुर्ती चाय बागान में तीन आंतरिक सड़कें बह गईं, कई ह्यूम पाइपों को भारी नुकसान पहुंचा है और घाटिया नदी ने अपना रुख बदलकर बागान की ओर मोड़ लिया है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। क्षेत्र के सबसे बड़े बागानों में से एक, चेंगमारी भी बाढ़ से बुरी तरह त्रस्त हुआ है। 1,450 हेक्टेयर भूमि में फैला यह बागान, जहाँ लगभग 3,500 श्रमिक कार्यरत हैं, अब विनाश का गवाह बन गया है। बागान अस्पताल में भी पानी भर गया, जिससे वहां भर्ती मरीजों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा।

आँकड़ों में तबाही: 80 लाख से 5.5 करोड़ तक का भारी नुकसान

टीएआई (Tea Association of India) के अनुसार, इस तबाही से हुआ कुल अनुमानित नुकसान 80 लाख रुपये से शुरू होकर चेंगमारी बागान में 5 से 5.5 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। सुमित घोष, जो इस उद्योग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल राहत पैकेज और बुनियादी ढांचा सुधार के लिए सहायता की पुरजोर अपील की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो हज़ारों श्रमिकों की आजीविका और चाय बागानों का भविष्य हमेशा के लिए खतरे में पड़ जाएगा।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version