उत्तराखंड न्यूज: चारधाम यात्रा में आस्था के नाम पर साल 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धामों में उठे बहुचर्चित क्यूआर कोड के विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। प्रदेश शासन ने इस गंभीर प्रकरण में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय के पत्र का कड़ा संज्ञान लिया है। मामले की तह तक जाने के लिए शासन ने चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम की एसआईटी जांच कराने के संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
शासन के पर्यटन विभाग की अनु सचिव सोनिया भारती की ओर से चमोली और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों को एक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में अजेंद्र अजय की विधिवत शिकायत का हवाला देते हुए दोनों जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रकरण पर अपनी सुस्पष्ट आख्या तत्काल शासन को प्रेषित करें। गौरतलब है कि अजेंद्र ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस पूरे क्यूआर कोड प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच एसआईटी से कराने की पुरजोर मांग की है।
अपने इस शिकायती पत्र में अजेंद्र ने उस घटना को याद दिलाया है जब वर्ष 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट खुले थे। उस दौरान दोनों ही पवित्र मंदिर परिसरों में रहस्यमयी तरीके से ऐसे बोर्ड लगा दिए गए थे, जिनमें क्यूआर कोड को स्कैन करके श्रद्धालुओं से सीधे दान और चढ़ावा देने की अपील की जा रही थी। जब यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बना, तब उन्होंने बीकेटीसी के तत्कालीन अध्यक्ष के रूप में इसकी आंतरिक छानबीन शुरू कराई। हालांकि, शुरुआती जांच-पड़ताल में मंदिर समिति के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई थी।
तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र के कड़े निर्देशों के बाद, बीकेटीसी के तत्कालीन प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी की तरफ से बदरीनाथ कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। लेकिन अजेंद्र का गंभीर आरोप है कि मंदिर समिति के जिम्मेदार अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच को बेहद लापरवाही और गोलमोल तरीके से अंजाम दिया गया। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं मिलने का दावा करते हुए चुपचाप न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट (FR) दाखिल कर दी।
अजेंद्र ने अपने पत्र में इस चौंकाने वाले तथ्य का भी जिक्र किया है कि जब न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तब बीकेटीसी का एक भी जिम्मेदार अधिकारी सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, जोशीमठ के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को वादी पक्ष की लगातार अनुपस्थिति का कड़ा संज्ञान लेना पड़ा और अंततः पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करना पड़ा।
अपनी बात को पुख्ता करते हुए अजेंद्र ने पत्र के साथ कई अहम तथ्यों और पुख्ता दस्तावेजों को संलग्न किया है, जिसके आधार पर उन्होंने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य शासन से मांग की है कि इस पूरे संदिग्ध प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाए और इसके लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए।
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