पहचान की धांधली: 2019 में शुरू हुआ वो मामला जिसने हिला दी सियासत
2019 में बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत के साथ हुआ था आगाज, अब्दुल्ला आजम पर लगे गंभीर आरोप
यह वो दौर था जब सियासत के गलियारों में एक नया भूचाल आने की आहट सुनाई देने लगी थी। साल 2019, जब बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने पुलिस थाने में एक ऐसी शिकायत दर्ज करवाई जिसने भविष्य में कई घटनाओं की नींव रखी। इस शिकायत के निशाने पर थे अब्दुल्ला आजम, जिन पर न सिर्फ धोखाधड़ी के बल्कि उससे भी कहीं ज़्यादा गंभीर आरोपों की बौछार की गई थी।
आकाश सक्सेना ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा था कि अब्दुल्ला आजम ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं का उल्लंघन किया है। इनमें शामिल थीं –
- धोखाधड़ी (IPC 420): यानी लोगों को ठगने और विश्वासघात करने का कृत्य।
- फर्जी दस्तावेज तैयार करना (IPC 467, 468): जिसमें वसीयत, या किसी अन्य मूल्यवान प्रतिभूति के जालसाजी का प्रयास या फिर ठगी करने के उद्देश्य से जालसाजी का आरोप शामिल था।
- फर्जी पहचान पत्र इस्तेमाल करना (IPC 471): यानी ऐसे किसी जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना।
शिकायत के अनुसार, यह सिर्फ कागजी खेल नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अपने असली नाम पर न केवल वैध दस्तावेज हासिल किए, बल्कि एक बिल्कुल नई पहचान गढ़कर, उसी के तहत फर्जी पासपोर्ट और पैन कार्ड भी तैयार करवाए। यह एक ऐसा जाल था जो बैंकिंग, वोटिंग और अन्य बेहद संवेदनशील कामों को प्रभावित कर सकता था। सवाल यह उठता है कि एक व्यक्ति एक ही समय में दोहरी पहचान के साथ कितने ऐसे कारनामे कर सकता है, और इसका अंजाम क्या हो सकता है? यह मामला सिर्फ एक विधायक की शिकायत बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने पहचान की प्रामाणिकता और उसके दुरुपयोग के गंभीर सवालों को जन्म दिया।
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