देश में हेट स्पीच की बढ़ती घटनाओं पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने नफरती भाषणों के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर मैराथन सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सभी पक्षों को अपनी दलीलों और सुझावों का लिखित सार पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
अदालत के सामने मुख्य चुनौती यह है कि सांप्रदायिक आधार पर होने वाली भड़काऊ बयानबाजी को रोकने के लिए क्या नए दिशानिर्देश या कोई विशेष तंत्र विकसित किया जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि 2018 में भीड़ की हिंसा रोकने के लिए आए कोर्ट के ऐतिहासिक आदेशों का जमीनी स्तर पर सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है। इसी के मद्देनजर, अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट नफरत के इस ज्वार को थामने के लिए कोई नई और सख्त कानूनी व्यवस्था लागू करता है।
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