देश के खिलाफ युद्ध और आतंकी साजिश: आसिया अंद्राबी की सजा पर सस्पेंस बरकरार, अब 2 फरवरी पर टिकी निगाहें
कश्मीरी अलगाववाद का चेहरा रही आसिया अंद्राबी और उसके प्रतिबंधित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ (डीईएम) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की एनआईए कोर्ट में शनिवार को दोषियों की सजा पर होने वाली सुनवाई टल गई है, जिसके बाद अब इस मामले की अगली कड़ी 2 फरवरी को सामने आएगी।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आसिया अंद्राबी समेत उसकी दो करीबियों—सोफी फहमिदा और नाहिदा नसरीन को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पहले ही दोषी करार दे दिया है। इन तीनों को आतंकी साजिश रचने (धारा 18) और आतंकी संगठन की सदस्यता लेने (धारा 38) जैसे गंभीर अपराधों का जिम्मेदार पाया गया है।
एनआईए की जांच में आसिया पर देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने और आतंकी गतिविधियों के लिए जाल बुनने के संगीन आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि ये आरोपी अलगाववादी एजेंडे को हवा देने और आतंकी नेटवर्क को जमीन पर उतारने के मुख्य सूत्रधार थे।
आतंकी रिश्तों और विवादों से आसिया का पुराना नाता रहा है। साल 2018 में गिरफ्तार हुई आसिया ने 1987 में ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ की नींव रखी थी, जो हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की महिला इकाई के तौर पर घाटी में अलगाववादी जहर घोलने का काम करती थी। बाद में भारत सरकार ने इस संगठन पर पाबंदी लगा दी। गौरतलब है कि सीमा पार बैठा खूंखार आतंकी हाफिज सईद भी आसिया अंद्राबी को अपनी ‘मुंहबोली बहन’ मानता है, जो इसके खतरनाक इरादों की गवाही देता है।
इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने इन तीनों महिलाओं को दोषी ठहराते हुए स्पष्ट किया था कि इनका मकसद सिर्फ संगठन चलाना नहीं, बल्कि लोगों को देश के खिलाफ भड़काना और आतंकी विचारधारा को बढ़ावा देना था। एनआईए की तफ्तीश में इनके देशविरोधी कारनामों की पूरी फेहरिस्त सामने आई थी।
मामले की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि पिछले साल लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में भी ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ की परछाई नजर आ रही है। जांच के दौरान गिरफ्तार शहजादा अख्तर पर इसी प्रतिबंधित संगठन को दोबारा जीवित करने और महिलाओं का आतंकी गुट सक्रिय करने का आरोप है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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