‘वंदे मातरम’ पर गरमाई सियासत: क्या थे इसके पीछे के अनसुने किस्से?
हाल ही में ‘वंदे मातरम’ को लेकर छिड़ी बहस के बीच, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दावे पर तीखे सवाल उठाए हैं। रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सब्यसाची भट्टाचार्य की ‘वंदे मातरम’ पर लिखी गई एक विस्तृत जीवनी के अंश साझा करते हुए, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा 29 अक्टूबर 1937 को ‘वंदे मातरम’ को अपनाने के प्रस्ताव के पीछे की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला है।
जीवनी के अंशों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव से ठीक तीन दिन पहले, 26 अक्टूबर 1937 को, महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने इस मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र लिखा था। यह तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरुदेव टैगोर का ‘वंदे मातरम’ से गहरा जुड़ाव था।
जीवनी के अनुसार, स्वयं टैगोर ने सुझाव दिया था कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंदों को ही राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया जाए। उनके इस पत्र ने कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव को गहराई से प्रभावित किया, जिससे ‘वंदे मातरम’ के राष्ट्रगीत बनने की राह प्रशस्त हुई।
जयराम रमेश द्वारा साझा किए गए ये अंश, ‘वंदे मातरम’ को अपनाने के ऐतिहासिक फैसले के पीछे की अनसुनी कहानियों को सामने लाते हैं, और इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक चर्चा में एक नया आयाम जोड़ते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नए खुलासों पर आगे क्या प्रतिक्रियाएं आती हैं।
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