AI चैटबॉट्स: वरदान या अभिशाप? जानिए क्या है सच्चाई!
आज के दौर में AI चैटबॉट्स का चलन ज़बरदस्त है। चाहे ऑफिस के काम हों या रिश्तों की उलझनें, लोग हर समस्या के समाधान के लिए इन डिजिटल सहायकों पर निर्भर हो रहे हैं। यह सच है कि चैटबॉट्स ने कई जटिल कार्यों को सहज बना दिया है, लेकिन सिक्के के दूसरे पहलू पर, ये ऐसे जोखिम भी पैदा कर सकते हैं जिनसे भारी नुकसान हो सकता है।
क्या AI पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है?
ChatGPT या Gemini जैसे चैटबॉट्स कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, उन पर अंधाधुंध विश्वास करना खतरनाक हो सकता है। ये चैटबॉट्स अपने प्रशिक्षण डेटा और संभावनाओं के आधार पर प्रतिक्रियाएँ देते हैं। इसका मतलब है कि सबसे उन्नत AI भी गलत या भ्रामक जानकारी दे सकता है। इसलिए, AI द्वारा कही गई हर बात को सच मान लेना बुद्धिमानी नहीं है।
आपकी निजी जानकारी की सुरक्षा: एक महत्वपूर्ण चिंता
भले ही चैटबॉट आपको कितना भी भरोसेमंद लगे, अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि आपके बैंक खाते के पासवर्ड या स्वास्थ्य संबंधी विवरण, कभी भी उनके साथ साझा न करें। यह जानकारी सीधे कंपनी के सर्वर पर जा सकती है, जिसका उपयोग AI को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सकता है। अपनी संवेदनशील जानकारी को अनजाने हाथों में पड़ने से बचाना आपका कर्तव्य है।
प्राइवेसी पॉलिसी को समझना: एक अनिवार्य कदम
बाजार में कई मुफ्त और तृतीय-पक्ष चैटबॉट्स उपलब्ध हैं, जो अक्सर उपयोगकर्ता की जानकारी को देश के बाहर संग्रहीत करते हैं। इसलिए, किसी भी चैटबॉट का उपयोग करने से पहले, उसकी गोपनीयता शर्तों को ध्यान से पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आपको कुछ भी संदिग्ध या चिंताजनक लगे, तो ऐसे चैटबॉट का उपयोग न करना ही समझदारी है।
- लेखक: पीयूष उपाध्याय
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