
मिशन 2029: अब 543 नहीं, 850 सांसदों वाली होगी लोकसभा; जानें क्या है सरकार का मेगा प्लान
Women Reservation Bill: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा में सीटों की कुल संख्या को बढ़ाकर अब 850 किया जाएगा। इस नए ढांचे में 815 सीटें सीधे तौर पर राज्यों को आवंटित की जाएंगी, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के हिस्से में 35 सीटें आरक्षित होंगी।
सदन में बढ़ेगी ‘नारी शक्ति’ की धमक: 273 सीटें होंगी आरक्षित
महिला आरक्षण अधिनियम में होने वाले इस संशोधन के बाद लोकसभा की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। सदन में महिलाओं की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 273 सीटें विशेष रूप से उनके लिए आरक्षित होंगी। गौर करने वाली बात यह है कि मौजूदा कानून के तहत यह आरक्षण 2034 से पहले संभव नहीं था, क्योंकि यह 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से बंधा हुआ था। लेकिन अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में जरूरी बदलाव कर इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने की तैयारी है। बता दें कि 2023 में पारित इस ऐतिहासिक बिल का लक्ष्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है।
Government proposes increasing the number of seats in the Lok Sabha. According to the proposal, The total number of seats will be increased to 850. Out of these, 815 seats will be allocated to the states. 35 seats will be reserved for Union Territories (UTs): Sources
— ANI (@ANI) April 14, 2026
16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र, पेश होगा ऐतिहासिक संशोधन
मोदी सरकार इस मिशन को अमलीजामा पहनाने के लिए 16 अप्रैल से संसद की तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाने जा रही है। इस बैठक का मुख्य केंद्र ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन पेश करना होगा। सरकार ने बजट सत्र के बीच ही इन तीन दिनों को विशेष रूप से इस महत्वपूर्ण विधायी कार्य के लिए सुरक्षित किया है।
परिसीमन विधेयक 2026: क्या बदलेंगे संवैधानिक समीकरण?
संविधान के अनुच्छेद 239AA, 330A, 332A और 334A के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई भागीदारी मिले। इसमें अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिला आरक्षण का प्रावधान शामिल है। इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य एक ‘परिसीमन आयोग’ का गठन करना है, जो न केवल सीटों का नए सिरे से निर्धारण करेगा, बल्कि शासन और नीति-निर्माण में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को भी कानूनी रूप से अनिवार्य बनाएगा।
The Delimitation Bill, 2026 | Articles 239AA, 330A, 332A and 334A provide for, as nearly as may be, one-third reservation of seats for women in the House of the People and the Legislative Assemblies of the States, including within the seats reserved for the Scheduled Castes and…
— ANI (@ANI) April 14, 2026
विकसित भारत के लिए महिलाओं का नेतृत्व जरूरी: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि 2029 के चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न होते हैं, तो हमारा लोकतंत्र अधिक जीवंत और सशक्त बनेगा। देश की महिलाओं के नाम लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब आधी आबादी नीति-निर्माण और बड़े निर्णयों का हिस्सा बनेगी, तब ‘विकसित भारत’ का संकल्प और भी तेजी से सिद्ध होगा।
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