BRICS में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: ईरान और UAE को कैसे किया एकजुट? जानें न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन की मुख्य बातें।

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BRICS Summit: ईरान और UAE को एक मंच पर कैसे लाया भारत? न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन की बड़ी बातें

BRICS Summit 2026: भारत का कूटनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ – ईरान और UAE को एक मंच पर लाने वाला ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की सबसे बड़ी कामयाबी के रूप में ‘नयी दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है. इस सम्मेलन की ऐतिहासिक सफलता यह रही कि भारत ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे विपरीत रणनीतिक हितों वाले देशों को एक साझा कूटनीतिक धरातल पर खड़ा कर दिया.

भारत ने यहाँ कोई औपचारिक शांति समझौता तो नहीं कराया, लेकिन ब्रिक्स के भीतर इन देशों को एक ‘साझा भाषा’ पर सहमत करने में निर्णायक भूमिका निभाई. यह भारत की ‘सहमति कूटनीति’ (Consensus Diplomacy) के उस नए उभरते मॉडल को दर्शाता है, जहाँ नई दिल्ली एक साथ ईरान, UAE, रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ संतुलन साधते हुए वैश्विक मंचों पर सर्वसम्मति बनाने की क्षमता रखती है.

ईरान और UAE के बीच कैसे बनी बात?

घोषणापत्र के मसौदे पर बातचीत आखिरी पल तक खिंची, क्योंकि पश्चिम एशिया के संकट को लेकर ईरान और UAE के रुख बेहद कड़े थे. चूंकि ब्रिक्स आम सहमति पर चलने वाला समूह है, इसलिए एक भी देश का ‘न’ पूरे घोषणापत्र को ठप कर सकता था. ऐसे में भारत ने दो मोर्चों पर काम किया:

  • संतुलित कूटनीति: भारत ने दोनों देशों को इस बात पर राजी किया कि वे एक-दूसरे के क्षेत्रों पर हुए हमलों की सीधी निंदा करने की जिद छोड़ दें.
  • साझा शब्दावली: ऐसी भाषा तैयार की गई जो किसी एक पक्ष की ओर झुकी न हो, बल्कि पश्चिम एशिया में अधिकतम संयम, कूटनीतिक समाधान और नागरिकों की सुरक्षा पर केंद्रित हो.

New Delhi Declaration: पश्चिम एशिया के लिए वैश्विक रोडमैप

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर ब्रिक्स ने एक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है:

  • अधिकतम संयम: सभी पक्षों से अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचें जो स्थिति को और बिगाड़ दे.
  • अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान: संघर्ष को केवल संवाद, कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायरे में रहकर सुलझाने पर जोर दिया गया.
  • परमाणु-मुक्त क्षेत्र: पश्चिम एशिया को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) से मुक्त बनाने के प्रयासों का समर्थन किया गया.
  • गाजा संकट और दो-राष्ट्र समाधान: गाजा से फलस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया और ‘दो-राष्ट्र समाधान’ के तहत उनके आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया गया.

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व्यापार, अमेरिकी टैरिफ और Global South का कड़ा संदेश

ब्रिक्स ने बिना किसी का नाम लिए व्यापारिक पाबंदियों और अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर कड़ा रुख जाहिर किया है.

  • एकतरफा शुल्कों का विरोध: समूह ने उन “अंधाधुंध” शुल्कों और प्रतिबंधों पर चिंता जताई जो WTO नियमों का उल्लंघन करते हैं.
  • सप्लाई चेन की सुरक्षा: ब्रिक्स का मानना है कि ऐसे प्रतिबंधों का सबसे बुरा असर ‘Global South’ (विकासशील और गरीब देशों) पर पड़ता है.
  • भारत का नजरिया: सुचारू वैश्विक व्यापार भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है. एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करता है.

क्यों मिली भारत की कूटनीति को बड़ी बढ़त?

ईरान, UAE, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों को एक ही मेज पर लाना भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रमाण है.

  • UN सुधार: घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की वकालत की गई ताकि विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिले.
  • भव्य आयोजन: भारत की अध्यक्षता में देश के 30 से अधिक शहरों में 400 से ज्यादा बैठकों का आयोजन हुआ, जिसने इस ऐतिहासिक सहमति की नींव रखी.

घोषणापत्र का आपके और हमारे जीवन पर क्या होगा असर?

ब्रिक्स की ये सिफारिशें सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, इनका सीधा संबंध आम आदमी से है:

  1. सस्ता ईंधन: पश्चिम एशिया में शांति का अर्थ है कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम नियंत्रित रह सकते हैं.
  2. महंगाई पर लगाम: वैश्विक सप्लाई चेन सुचारू रहने से जरूरी सामानों की किल्लत नहीं होती, जो महंगाई को रोकने में मददगार है.
  3. रोजगार और बाजार: डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और MSME (लघु उद्योग) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भारतीय उद्यमियों के लिए विदेशों में नए बाजार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

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