जमीन से अंतरिक्ष तक चीन का 6-तरफा प्रहार! क्या ‘थ्री-फ्रंट वॉर’ के लिए तैयार है भारत? पूर्व कर्नल सोढ़ी का बड़ा खुलासा।

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
7 Min Read
जमीन से अंतरिक्ष तक 6 मोर्चों पर हमला कर सकता है चीन! पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी ने बताया, थ्री-फ्रंट वॉर के लिए भारत कितना तैयार?

ड्रोन्स, साइबर और स्पेस: क्या 50 साल पुराने हथियारों से चीन की ‘6-तरफा’ घेराबंदी का मुकाबला कर पाएगा भारत?

India China Border Tension: “अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई जगहों पर फेसऑफ की स्थिति बनी हुई है और यह सिलसिला अब भी जारी है। कड़वी सच्चाई यह है कि चीन का मुकाबला अब पारंपरिक तरीकों से करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। सेना में पांच दशकों से सक्रिय लोग जानते हैं कि आज भी हम मोर्टार 81 एमएम और 51 एमएम जैसे उन हथियारों पर निर्भर हैं, जो 50 साल पहले भी इस्तेमाल हो रहे थे। कुछ बदलावों को छोड़ दें, तो बुनियादी ढांचा वही है।”

यह गंभीर बयान राजस्थान के अलवर में आयोजित ITBP के एक कार्यक्रम में महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने दिया। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक एक नई बहस छेड़ दी है: क्या भारतीय सेना वाकई दशकों पुराने हथियारों के भरोसे है? और अगर ऐसा है, तो हम चीन और पाकिस्तान जैसी दोहरी चुनौतियों के लिए कितने तैयार हैं? इन सुलगते सवालों के जवाब ‘चाइना वॉर क्लाउड’ के लेखक और पूर्व सैन्य अधिकारी जेएस. सोढ़ी ने विस्तार से दिए हैं।

आखिर सीमा पर अचानक हलचल क्यों बढ़ी?

इस चर्चा का केंद्र ITBP महानिदेशक का वह बयान है, जिसमें उन्होंने अरुणाचल सीमा पर स्थिति को ‘नाजुक’ करार दिया है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि तनाव तब बढ़ता है जब चीनी सैनिक तय गश्ती प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हैं। विदेश प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत और चीन सैन्य व कूटनीतिक रास्तों से LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही खड़ा है—बातचीत के बीच हमारी तैयारी का स्तर क्या है?

क्या वाकई हम 50 साल पीछे हैं?

पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल सोढ़ी ITBP चीफ की बात से पूरी तरह असहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि 81 एमएम मोर्टार जैसे हथियार पुराने जरूर हैं, लेकिन युद्ध क्षेत्र में उनकी प्रभावशीलता आज भी बेमिसाल है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि आधुनिक तकनीक की जरूरत अपरिहार्य है। हथियारों का आधुनिकीकरण रातों-रात नहीं होता; इसमें सालों का वक्त लगता है। अच्छी खबर यह है कि सरकार ने अब पुराने हथियारों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

चीन बनाम भारत: सैन्य ताकत का कड़वा सच

सोढ़ी के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) सैन्य तकनीक के मामले में भारत से करीब 30 साल आगे खड़ी है। इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मैदानी जंग में चीन की तैयारी भारत से 30 गुना अधिक है। इसका मुख्य कारण चीन का ‘एडवांस मोबलाइज्ड आर्म्ड वेपन’ सिस्टम है, जबकि भारत आज भी काफी हद तक पुरानी तकनीक पर टिका है।

‘6-मोर्चों’ पर हमले की चीनी साजिश!

भविष्य का युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहेगा। सोढ़ी ने चेतावनी दी कि चीन अब ‘6-आयामी’ हमले की रणनीति पर काम कर रहा है। सीधा हमला करने से पहले वह स्पेस (अंतरिक्ष), साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के जरिए देश की संचार और बिजली व्यवस्था को ठप कर सकता है।

अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बिना एक भी गोली चलाए यही तरीका अपनाया था। सोढ़ी का दावा है कि भारत जमीन, पानी और आसमान में तो मजबूत है, लेकिन साइबर और स्पेस वॉरफेयर के लिए हमारी सुरक्षा व्यवस्था को अभी बहुत काम करना बाकी है।

तकनीक की रेस में चीन का दबदबा

दुनिया की सेनाओं में इस्तेमाल होने वाली 64 महत्वपूर्ण तकनीकों में से 57 में चीन सबसे आगे है, जबकि शेष 7 में अमेरिका को बढ़त है। चीन ने अपनी सेना में सैनिकों की संख्या कम करके उस पैसे को अत्याधुनिक तकनीक, टैंक और तोपों के निर्माण में लगाया है। सोढ़ी का कहना है कि भारत को भी अब स्वदेशी रक्षा अनुसंधान (R&D) पर निवेश बढ़ाना ही होगा।

‘थ्री-फ्रंट वॉर’ का बढ़ता खतरा

भारत के लिए चुनौती अब सिर्फ दो नहीं, बल्कि तीन मोर्चों की हो सकती है। चीन और पाकिस्तान के साथ-साथ अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश के बदलते हालातों ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। सोढ़ी ने अंदेशा जताया कि 2036 तक चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत पर हमला कर सकते हैं और उस वक्त बांग्लादेश की अस्थिरता भारत के लिए तीसरा मोर्चा खोल सकती है।

संकट के बीच ITBP की नई ‘ढाल’

चीन से मुकाबले के लिए ITBP ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं:

  1. ड्रोन प्लाटून: हर बटालियन में एक विशेष ‘ड्रोन प्लाटून’ बनाई गई है। दुर्गम पहाड़ियों पर नजर रखने के लिए जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  2. भारी निवेश: आधुनिकीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये का फंड मिला है, जिसका 70% हिस्सा ड्रोन तकनीक पर खर्च होगा। इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की एक और योजना को मंजूरी दी है।
  3. ‘स्ट्राइक’ और ‘शौर्य’ ट्रेनिंग: गलवान जैसी हिंसक झड़पों से निपटने के लिए जवानों को ‘स्ट्राइक’ नामक विशेष क्लोज-कॉम्बैट ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, ‘शौर्य’ कमांडो दस्ता तैयार किया गया है, जिसने अरुणाचल में अपनी ताकत दिखाई है।
  4. अंडरग्राउंड बंकर: सीमा चौकियों पर भूमिगत बंकर बनाए जा रहे हैं, ताकि भीषण गोलाबारी और कड़ाके की ठंड में भी जवान सुरक्षित रहकर मोर्चा संभाल सकें।

स्पष्ट है कि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन भारत अब पुरानी कमियों को आधुनिक तकनीक और विशेष युद्ध कौशल से भरने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।


Also Read: ITBP चीफ का खुलासा- अरुणाचल बॉर्डर पर चीन के साथ अब भी जारी है टकराव, कई बार आमने-सामने आए जवान


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version