धनबाद का गौरव: राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुईं मुनमुन भट्टाचार्य, नवाचार से बदली शिक्षा की सूरत
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर धनबाद की समर्पित शिक्षिका मुनमुन भट्टाचार्य को देश के सर्वोच्च ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ से नवाजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया। मुनमुन भट्टाचार्य, जो मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका हैं, ने सीमित संसाधनों के बीच नवाचार और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाकर राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाई है।
इस सम्मान के साथ उन्हें 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि, रजत पदक और प्रशस्ति-पत्र भेंट किया गया। पुरस्कार ग्रहण करने के बाद ‘अवेयर मीडिया न्यूज़’ के साथ विशेष चर्चा में उन्होंने अपने शिक्षण के अनूठे प्रयोगों और बच्चों के भविष्य को लेकर अपने विजन को विस्तार से साझा किया।
## मेरी सफलता नहीं, यह सामूहिक प्रयास की गूंज है
मुनमुन भट्टाचार्य इस उपलब्धि का श्रेय स्वयं को देने के बजाय इसे ‘टीम वर्क’ का परिणाम मानती हैं। उनका कहना है कि यह पुरस्कार विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के साझा संघर्ष और लगन का सम्मान है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि धनबाद की मिट्टी को यह गौरव मिलना उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बढ़कर है।
## भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहे बच्चे
विद्यालय में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों का मुख्य केंद्र ‘सतत विकास लक्ष्य’ हैं। बच्चों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकटों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत और प्रकृति प्रेम जैसे विषयों को किताबी ज्ञान से निकालकर उनके व्यवहार में शामिल किया जा रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा केवल सिलेबस पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों को अपने परिवेश की समस्याओं का समाधान खोजने के काबिल बनाना है।
## ‘कबाड़ से कमाल’ और नवाचारी शिक्षण सामग्री
मुनमुन भट्टाचार्य ने साबित कर दिया कि बेहतर शिक्षा के लिए महंगे उपकरणों की नहीं, बल्कि रचनात्मक सोच की जरूरत होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अनुसरण करते हुए वे ‘जीरो कोस्ट’ और ‘लो कोस्ट’ शिक्षण सामग्री (TLM) पर जोर देती हैं। विद्यालय में बेकार और कबाड़ पड़े सामान से ज्ञानवर्धक उपकरण तैयार किए जाते हैं, ताकि बच्चे खेल-खेल में जटिल सिद्धांतों को समझ सकें। उनके अनुसार, वास्तविक शिक्षा किताबों के पन्नों से बाहर रोजमर्रा के अनुभवों में छिपी है।
## खनन क्षेत्र की चुनौतियां और शिक्षा की अलख
धनबाद जैसे खनन बहुल क्षेत्र में बच्चों को नियमित रूप से स्कूल से जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक तंगहाली के कारण अक्सर बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। मुनमुन भट्टाचार्य इन चुनौतियों का सामना करने के लिए शिक्षा को स्थानीय परिवेश और बच्चों की जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास करती हैं, ताकि उनका जुड़ाव विद्यालय से बना रहे।
## छात्राओं की उच्च शिक्षा के प्रति विशेष चिंता
उन्होंने छात्राओं की शिक्षा के गिरते स्तर पर अपनी चिंता व्यक्त की। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर तो लड़कियां स्कूल आती हैं, लेकिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक तक पहुंचते-पहुंचते उनकी संख्या कम होने लगती है। उनका संकल्प है कि केवल नामांकन ही नहीं, बल्कि छात्राओं की निरंतर शिक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
## शिक्षक और अभिभावक: उज्ज्वल भविष्य के दो स्तंभ
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए वे शिक्षक और अभिभावक के बीच मजबूत साझेदारी को अनिवार्य मानती हैं। मुनमुन के अनुसार, विद्यालय के वातावरण के साथ-साथ बच्चे के पारिवारिक और सामाजिक परिवेश को समझना भी बेहद जरूरी है। उनका संदेश स्पष्ट है—यदि सोच सकारात्मक हो और प्रयास सामूहिक, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों के भविष्य को एक नई और सुनहरी दिशा दी जा सकती है।
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