होर्मुज का ‘चक्रव्यूह’ भेदकर भारत पहुंचा ‘नंदा देवी’: 46,500 टन LPG के साथ गुजरात में दी दस्तक, अब खत्म होगी गैस की किल्लत!
जामनगर/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी हमलों के डर के बीच भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर आई है। भारतीय एलपीजी कैरियर ‘नंदा देवी’ मंगलवार को सुरक्षित रूप से गुजरात के वाडीनार पोर्ट (द्वारका जिला) पहुंच गया है। यह विशालकाय जहाज अपने साथ 46,500 मीट्रिक टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है, जिससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति को बड़ा सहारा मिलेगा।
शिप-टू-शिप ट्रांसफर से पहुंचेगी गैस
वाडीनार पोर्ट पर अब ‘नंदा देवी’ (मदर वेसल) से ‘एमटी बीडब्लू बिर्च’ (डॉटर वेसल) में एंकरिज पर एलपीजी ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस मिशन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन खुद जहाज पर पहुंचे और कैप्टन व क्रू सदस्यों से मुलाकात कर इस सुगम मार्ग सुनिश्चित करने के लिए उनकी सराहना की।
ईरानी पाबंदियां और भारत की कूटनीतिक जीत
नंदा देवी का यह सफर कांटों भरा था। यह जहाज सऊदी अरब के ‘रास अल खैर’ से एलपीजी लेकर रवाना हुआ था। रास्ते में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई चेन ठप होने का खतरा पैदा हो गया था। हालांकि, भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति के दम पर इस संकट का समाधान निकाला और खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली अपनी खेप के लिए विशेष छूट हासिल की।
जहाज के मुख्य अधिकारी के अनुसार, भारतीय नौसेना और ईरानी नौसेना ने आपसी समन्वय के साथ ‘नंदा देवी’ को सुरक्षित रास्ता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाजार पर क्या होगा असर?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नंदा देवी के भारत पहुंचने से गैस वितरण नेटवर्क पर दबाव कम होगा। इससे न केवल सिलेंडर बुकिंग का वेटिंग पीरियड घटेगा, बल्कि घबराहट में हो रही खरीदारी (Panic Buying) के कारण बढ़ी कीमतों पर भी लगाम लगेगी।
शिवालिक और जग लाडकी भी कतार में
होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचने वाला यह दूसरा बड़ा एलपीजी कैरियर है। इससे पहले सोमवार को ‘शिवालिक’ 46,000 मीट्रिक टन गैस लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था। वहीं, भारतीय ध्वज वाला एक अन्य जहाज ‘जग लाडकी’ 81,000 टन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों अहम है यह रूट?
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है।
- एक जहाज की क्षमता: लगभग 60,000 टन गैस (करीब 40 लाख सिलेंडरों के बराबर)।
- मौजूदा स्थिति: फारस की खाड़ी में फिलहाल 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक मौजूद हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कैसे सुलझा ईरान के साथ मामला?
शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कूटनीतिक सौदेबाजी के तहत भारत द्वारा कुछ जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति और ईरानी जहाजों की रिहाई के बदले भारतीय नौसेना के वॉरशिप्स की सुरक्षा में इन टैंकरों को रास्ता दिया जा रहा है। सरकार अब रिफाइनरियों और वितरकों के साथ मिलकर इस गैस को जल्द से जल्द उपभोक्ताओं के किचन तक पहुंचाने की तैयारी में है।
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