नेपाल में नया सियासी सूर्योदय: बालेन शाह और आरएसपी की ऐतिहासिक क्रांति
नेपाल की राजनीति में हिमालयी हवाओं ने एक नई करवट ली है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की ऐतिहासिक जीत ने न केवल देश के पुराने सियासी ढांचे को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि यह हिमालयी राष्ट्र में एक व्यापक लोकतांत्रिक परिवर्तन का बिगुल भी है। 2022 में रवि लामिछाने द्वारा स्थापित इस पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के लिए बलेंद्र ‘बालेन’ शाह को अपना चेहरा बनाया। बालेन ने ‘मधेश के पुत्र’ के रूप में अपनी पहचान बनाई और ‘अब की बार बलेंद्र सरकार’ के बुलंद नारे के साथ पूरे चुनाव अभियान को एक नई दिशा दी। पिछले साल जिस ‘जेन जी’ (Gen Z) आंदोलन ने केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा की थी, उसी युवा जोश ने इस बार चुनाव की तस्वीर बदल दी। भ्रष्टाचार, आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी से उपजे असंतोष ने पारंपरिक शक्तियों को किनारे कर दिया।
परंपरागत राजनीति की विदाई और युवाओं का उदय
नेपाल की राजनीति में दशकों तक केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की माओवादी पार्टी का दबदबा रहा। लेकिन इस चुनाव के नतीजे पुरानी पार्टियों की स्पष्ट अस्वीकृति हैं। चुनाव में 1.89 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी रही, जिसमें 9.15 लाख से अधिक नए युवा मतदाता शामिल थे। इन नए वोटरों ने आरएसपी को प्रतिनिधि सभा में भारी बहुमत दिलाकर यह साफ कर दिया कि वे अब सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन चाहते हैं। अब दुनिया की नजरें आरएसपी के उन महत्वाकांक्षी वादों पर हैं, जो उन्होंने अपने घोषणापत्र में किए हैं।
व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव का संकल्प
आरएसपी का सुधार एजेंडा किसी झटके से कम नहीं है। पार्टी ने सीधे चुने गए प्रधानमंत्री और पूरी तरह आनुपातिक संसदीय प्रणाली की वकालत की है। सत्ता संभालने के महज 100 दिनों के भीतर संवैधानिक संशोधनों पर बहस शुरू करने की उनकी प्रतिबद्धता साहसिक है। पार्टी का एक क्रांतिकारी प्रस्ताव यह भी है कि सांसद मंत्री नहीं बनेंगे, ताकि कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण प्रभावी रहे। साथ ही, 1990 के बाद से सभी सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति की जांच और अवैध संपत्ति का राष्ट्रीयकरण करने का वादा भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके कड़े रुख को दर्शाता है।
आर्थिक महाशक्ति बनने का सपना और डिजिटल विजन
प्रशासनिक स्तर पर आरएसपी ने संघीय मंत्रालयों की संख्या को सीमित कर 18 करने और 14 मंत्रालयों की कमान विशेषज्ञों को सौंपने का खाका तैयार किया है। आर्थिक मोर्चे पर नेपाल को ‘डिजिटल हब’ बनाने के लिए आईटी क्षेत्र को राष्ट्रीय रणनीतिक उद्योग घोषित करने की योजना है। अगले दशक में 30,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य और 12 लाख नौकरियां पैदा कर जीडीपी को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का वादा नेपाल की नई आर्थिक उड़ान का संकेत है।
इस ऐतिहासिक पल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता को बधाई देते हुए कहा, “नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का यह गौरवपूर्ण क्षण है। एक घनिष्ठ पड़ोसी के रूप में भारत, नेपाल की नई सरकार के साथ शांति और प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रतिबद्ध है।”
‘नेपाल फर्स्ट’: भारत और चीन के बीच नया कूटनीतिक संतुलन
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बालेन शाह का उदय भारत के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों है। पारंपरिक रूप से भारत के संबंध नेपाली कांग्रेस और यूएमएल के साथ रहे हैं, लेकिन शाह एक ‘टेक्नोक्रेट’ और प्रखर राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभरे हैं। उनका ‘नेपाल फर्स्ट’ का दृष्टिकोण समानता पर आधारित है। ‘वृहत नेपाल’ मानचित्र और भारतीय फिल्मों पर पाबंदी जैसे उनके पिछले कदम उनके राष्ट्रवादी मिजाज की झलक देते हैं। अब दो-तिहाई बहुमत के साथ, उनके पास 1950 की संधि और कालापानी-लिपुलेख जैसे संवेदनशील मुद्दों पर एक नया रुख अपनाने की ताकत है।
आरएसपी का संकल्प नेपाल को भारत और चीन के बीच महज एक ‘बफर स्टेट’ के बजाय एक ‘सक्रिय सेतु’ (वाइब्रेंट ब्रिज) बनाने का है। शाह की चुनौती भारत, चीन और अमेरिका के साथ संतुलन साधने की होगी। भारत के लिए यह मौका है कि वह अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को बालेन शाह की विकासवादी प्राथमिकताओं—जैसे जलविद्युत और डिजिटल कनेक्टिविटी—के साथ जोड़कर एक नई साझेदारी की नींव रखे। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि शाह की राष्ट्रवादी नीति ‘चीन की ओर’ न झुक जाए, बल्कि सांस्कृतिक और भौगोलिक जुड़ाव के जरिए दोनों देश अपनी गरिमापूर्ण मित्रता को एक नए युग में ले जाएं।
(ये लेखक डॉ. सौरभ के निजी विचार हैं)
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