नेहा बोरा और पीस बॉन्ड का मामला क्या है दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी चर्चा

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड पर साइन करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर उनसे किसकी शांति बनाए रखने के लिए कहा जा रहा है। नेहा का कहना है कि सरकार के खिलाफ अपनी बात रखना और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना लोकतंत्र में हर नागरिक का अधिकार है।

नेहा बोरा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली हाईकोर्ट उनकी याचिका खारिज कर चुका है। इस याचिका में उन्होंने पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी जिसमें उनसे 10 हजार रुपये का निजी मुचलका भरने और शांति बनाए रखने के लिए पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था।

दरअसल 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत उन्हें नोटिस जारी किया गया था। इसमें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। उनसे यह बताने को भी कहा गया था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे निजी मुचलका क्यों न लिया जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने के साथ मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया था कि नेहा बोरा को नोटिस जारी करने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। इसके बाद उन्हें संबंधित कागजात दिए गए। हालांकि नेहा ने साफ कर दिया कि वह पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी।

नेहा बोरा ने कहा कि सड़कों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका सवाल है कि अगर सरकार से सवाल पूछना ही शांति के लिए खतरा माना जाएगा तो फिर आम लोग अपनी शिकायतें कैसे सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना और उनकी नीतियों से असहमति जताना लोकतंत्र का जरूरी हिस्सा है।

यह पूरा मामला दिल्ली में हुए लहरा दो तिरंगा मार्च से जुड़ा है। 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को उस समय हिरासत में लिया था जब वह इस मार्च में शामिल हुई थीं। प्रदर्शन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।

नेहा ने अदालत में भी कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए। अब पीस बॉन्ड पर उनके इनकार और उठाए गए सवालों के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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