
- दोहरा चरित्र: समाज सुधारक का मुखौटा, कातिल की रूह
- जब खुद हत्यारे ने ही की ‘फांसी’ की मांग
- रिश्तों का उलझा जाल और पुलिस को गुमराह करने की साजिश
- अंधविश्वास की कालकोठरी और भगताइन का खौफनाक षड्यंत्र
- रामनवमी की वह काली रात: कैसे लिखी गई मौत की इबारत
- इंसानियत का कत्ल: रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर
- कानून का शिकंजा: कैसे बेनकाब हुए दरिंदे
- भीम राम की चालाकी और एसपी का खुलासा
- इंसाफ की ओर बढ़ते कदम: पुलिस की सख्त कार्रवाई
हजारीबाग हत्याकांड: भीम राम—महज एक नाम नहीं, बल्कि दरिंदगी की उस इंतहा का चेहरा है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा गांव में 12 साल की मासूम की बलि देने वाला यह वही शख्स है, जिसने अंधविश्वास की वेदी पर एक बच्ची के सपनों को कुचल दिया। तंत्र-मंत्र के खौफनाक खेल में एक कथित भगताइन के इशारे पर भीम राम ने पहले मासूम का गला घोंटा और जब वह तड़पने लगी, तो उसकी अपनी सगी मां शांति देवी ने उसके पैर जकड़ लिए। बेसुध बच्ची के सिर पर पत्थर मारकर खून निकाला गया, जिससे भगताइन ने ‘शुद्धि’ के लिए जमीन लीपी थी।
दोहरा चरित्र: समाज सुधारक का मुखौटा, कातिल की रूह
भीम राम का असली चेहरा जांच के साथ ही परत-दर-परत उघड़ता गया। विडंबना देखिए कि जिस हाथों से उसने कत्ल किया, उन्हीं हाथों को लहराकर वह गिरफ्तारी से पहले टीवी कैमरों पर कानून-व्यवस्था की दुहाई दे रहा था। वह सरकार को नसीहतें दे रहा था कि बेटियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। आज उसका वही वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी नकली “नैतिकता” और असली “क्रूरता” के बीच का अंतर साफ नजर आ रहा है।
जब खुद हत्यारे ने ही की ‘फांसी’ की मांग
भीम राम की अदाकारी ऐसी थी कि किसी को शक न हो। उसने कई इंटरव्यू में जोश के साथ कहा था, ‘अपराधियों पर ऐसी कार्रवाई हो कि रूह कांप जाए। झारखंड में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। हेमंत सोरेन सरकार से मेरी मांग है कि इस घटना के गुनहगार को सीधे फांसी के फंदे पर लटकाया जाए।’ आज पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद लोग उसकी इसी ‘एक्टिंग’ पर थू-थू कर रहे हैं, जो वह जांच को भटकाने के लिए कर रहा था।
रिश्तों का उलझा जाल और पुलिस को गुमराह करने की साजिश
स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि भीम राम और बच्ची की मां रेशमी देवी के बीच पिछले 10 वर्षों से अवैध संबंध थे। इसी निकटता का फायदा उठाकर वह न केवल पुलिस को भ्रमित कर रहा था, बल्कि राजनेताओं को भी गलत दिशा में ले जाने की कोशिश में जुटा था। हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने साफ किया कि भीम राम ने जांच एजेंसियों को उलझाने के लिए हर संभव चाल चली, लेकिन कानून के लंबे हाथों से वह बच नहीं सका।
अंधविश्वास की कालकोठरी और भगताइन का खौफनाक षड्यंत्र
इस दिल दहला देने वाली वारदात की जड़ में वह अंधविश्वास है, जो आज भी समाज में कैंसर की तरह फैला है। गांव की कथित भगताइन शांति देवी ने मृतका की मां रेशमी देवी के दिमाग में यह जहर भरा कि उसके बेटे की बीमारियां और परेशानियां तभी दूर होंगी, जब किसी ‘कुंवारी कन्या’ की बलि दी जाएगी। बेटे के मोह में अंधी हुई मां पिछले एक साल से इस ढोंगी भगताइन के संपर्क में थी, और धीरे-धीरे विश्वास एक जघन्य अपराध की साजिश में तब्दील हो गया।
रामनवमी की वह काली रात: कैसे लिखी गई मौत की इबारत
24 मार्च की रात, जब पूरा गांव रामनवमी के मंगला जुलूस के उत्साह में डूबा था, तब एक मासूम की मौत की तैयारी हो रही थी। करीब आठ बजे मां अपनी ही बेटी को लेकर शांति देवी के घर पहुंची। भगताइन ने ऐलान किया कि रात नौ बजे ‘देवास’ उतरेगा और वही बलि का समय होगा। इस खौफनाक काम में मदद के लिए रेशमी देवी ने अपने करीबी भीम राम को बुलाया। तीनों ने मिलकर उस मासूम के खिलाफ चक्रव्यूह रचा, जिसने उन्हें अपना रक्षक समझा था।
इंसानियत का कत्ल: रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर
भगताइन ने पहले मनसा मंदिर में ढोंग किया, फिर बच्ची को बांसबाड़ी ले जाया गया। वहां ‘भूत बांधने’ के नाम पर बच्ची को जमीन पर लिटाया गया। मंत्रों के शोर के बीच जैसे ही भगताइन ने ‘देवास’ के आने का इशारा किया, भीम राम ने बच्ची का गला दबाना शुरू कर दिया। जब मां की ममता मर गई और उसने अपनी तड़पती बेटी के पैर पकड़ लिए, तब भीम राम ने पत्थर से उसके सिर पर प्रहार किया। बहते हुए खून से पूजा की जमीन लीपी गई—एक ऐसा दृश्य जिसे सुनकर पत्थर दिल भी रो पड़े।
कानून का शिकंजा: कैसे बेनकाब हुए दरिंदे
25 मार्च को स्कूल के पीछे मिले शव ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को प्रशिक्षु आईपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) का गठन किया गया। वैज्ञानिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और तकनीकी इनपुट्स ने पुलिस को इन दरिंदों के दरवाजे तक पहुंचा दिया। हर सबूत की कड़ी जुड़ती गई और भीम राम का झूठ ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
भीम राम की चालाकी और एसपी का खुलासा
एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में भीम राम की धूर्तता का पर्दाफाश करते हुए बताया कि वह लगातार पुलिस को गुमराह करने के लिए नई-नई कहानियां गढ़ रहा था। उसके और रेशमी देवी के पुराने संबंधों ने इस अपराध को और भी पेचीदा बना दिया था। उसने न केवल कत्ल में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि पूरे तंत्र को बेवकूफ बनाने की नाकाम कोशिश भी की।
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इंसाफ की ओर बढ़ते कदम: पुलिस की सख्त कार्रवाई
पुलिस ने भीम राम, रेशमी देवी और शांति देवी—तीनों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पुख्ता चार्जशीट दाखिल कर स्पीडी ट्रायल के जरिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस केस को सुलझाने में तकनीकी विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों की टीम ने दिन-रात एक कर दिया ताकि मासूम को इंसाफ मिल सके।
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