UP News: लखनऊ की पहचान अब सिर्फ पुराने विधान भवन से नहीं होगी। गोमतीनगर की 245 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित नया विधानसभा परिसर आधुनिक सुविधाओं और खास वास्तुशिल्प के साथ आकार लेने जा रहा है। कमल की पंखुड़ियों से प्रेरित डिजाइन और विशाल परिसर इसे प्रदेश की नई प्रशासनिक पहचान देने की तैयारी में है।
सहारा शहर की जमीन पर बनेगा नया परिसर
नए विधान भवन के लिए गोमतीनगर के विपुलखंड स्थित सहारा शहर की करीब 245 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इस जमीन पर सिर्फ सदन की इमारत नहीं होगी, बल्कि विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जरूरी सुविधाओं के साथ प्रशासनिक कार्यालय, बैठक कक्ष और अन्य व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
कमल की पंखुड़ियों से प्रेरित डिजाइन
प्रस्तावित विधानसभा भवन का सबसे आकर्षक पहलू इसका डिजाइन है। रिपोर्टों के मुताबिक नए विधान भवन के लिए कमल की आकृति से प्रेरित मॉडल को आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक और भारतीय स्थापत्य भावनाओं को एक साथ जोड़ना है।
परियोजना फिलहाल डिजाइन और प्लानिंग के चरण में है। LDA ने कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, जबकि जुलाई में कुछ कंपनियों ने परियोजना से जुड़े डिजाइन भी प्रस्तुत किए।
LDA के हाथ में प्रोजेक्ट की कमान
पूरे प्रोजेक्ट में लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA की महत्वपूर्ण भूमिका है। जमीन से जुड़ी प्रक्रिया, मास्टर प्लान, डिजाइन और विकास संबंधी काम इसी एजेंसी की निगरानी में आगे बढ़ेंगे।
रिपोर्टों के मुताबिक निर्माण कार्य 2027 में शुरू होने की संभावना है। वहीं परियोजना के पूरा होने का लक्ष्य 2029-30 के आसपास बताया गया है। हालांकि अंतिम समयसीमा विस्तृत परियोजना और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
100 साल से ज्यादा पुरानी है मौजूदा इमारत
लखनऊ का मौजूदा विधान भवन लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और लोकतांत्रिक इतिहास का गवाह रहा है। इसका शिलान्यास 15 दिसंबर 1922 को हुआ था और 21 फरवरी 1928 को इमारत पूरी हुई थी। अब यह ऐतिहासिक भवन करीब एक सदी पुराना हो चुका है।
बदलती तकनीकी जरूरतों, सुरक्षा, प्रशासनिक सुविधाओं और बढ़ती गतिविधियों के बीच नए परिसर की जरूरत महसूस की जा रही है।
ट्रैफिक और सुरक्षा भी बड़ी वजह
मौजूदा विधानसभा हजरतगंज के व्यस्त इलाके में स्थित है। विधानसभा सत्र और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आसपास के रास्तों पर यातायात दबाव बढ़ जाता है। कई बार मार्ग प्रतिबंधित होने से दूसरे चौराहों पर भी जाम की स्थिति बनती है।
नया परिसर अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में विकसित होने से प्रशासनिक गतिविधियों को एक व्यवस्थित कैंपस में समेटने की कोशिश होगी।
सिर्फ भवन नहीं, नई प्रशासनिक पहचान
नया विधानसभा परिसर उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक नई इमारत नहीं होगा। इसकी योजना में आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक सुविधाओं और विधायी कामकाज को एक ही परिसर में बेहतर तरीके से संचालित करने की सोच दिखाई देती है।
अब नजर इस बात पर है कि डिजाइन को अंतिम रूप देने के बाद जमीन पर काम कितनी तेजी से शुरू होता है। अगर योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में गोमतीनगर का यह हिस्सा उत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक गतिविधियों का नया केंद्र बन सकता है।
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