भारतीय तटरक्षक बल: डिजिटल युग में समुद्री सुरक्षा का नया अध्याय

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भारतीय तटरक्षक बल: डिजिटल युग में समुद्री सुरक्षा का नया अध्याय
समुद्री सुरक्षा के प्रहरी भारतीय तटरक्षक बल को आधुनिक तकनीक का करना होगा प्रयोग

रक्षा का बदलता चेहरा: तकनीक की लहरों पर सवार समुद्री सुरक्षा

आज के हाई-टेक युग में, समुद्री खतरे केवल नावों और हथियारबंद समूहों तक सीमित नहीं रहे। वे अब जीपीएस स्पूफिंग, ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार और डार्क वेब के जरिए अपना जाल बिछा रहे हैं। आतंकवादी संगठन डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य में, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग-आधारित निगरानी, ड्रोन, साइबर रक्षा प्रणाली और स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र को एकीकृत करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

आईसीजी: 7500 किलोमीटर तटरेखा का प्रहरी

सोमवार को, 42वें भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के विशाल 7500 किलोमीटर लंबे समुद्र तट और द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा में आईसीजी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। एक मामूली शुरुआत से, आईसीजी आज 152 जहाजों और 78 विमानों के एक शक्तिशाली बल में तब्दील हो गया है। जहां सशस्त्र बल बाहरी खतरों से निपटते हैं और अन्य एजेंसियां आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा संभालती हैं, वहीं आईसीजी दोनों मोर्चों पर डटा हुआ है। यह तीन दिवसीय सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते सामरिक महत्व, परिचालन चुनौतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गहन मंथन का मंच बनेगा।

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा: एक जटिल भूलभुलैया

जमीनी सीमाओं की तुलना में समुद्री सीमाओं की रक्षा कहीं अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण है। जहां जमीनी सीमाएं स्थिर, स्पष्ट रूप से चिह्नित और अनुमानित होती हैं, वहीं समुद्री सीमाएं ज्वार-भाटे, लहरों और मौसम के कारण लगातार बदलती रहती हैं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एक तस्करी करने वाला जहाज एक साधारण मछली पकड़ने वाली नाव जैसा दिख सकता है, और आतंकवादी समूह समुद्र की असीमित विशालता का फायदा उठा सकते हैं, जिससे खतरे अप्रत्याशित रूप से उभर सकते हैं। इसके लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है। साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अब केवल काल्पनिक खतरे नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत हैं। कई राष्ट्र मिसाइलों के बजाय हैकिंग, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के माध्यम से हमारी प्रणालियों को पंगु बनाने की कोशिश कर सकते हैं। आईसीजी को ऐसे खतरों से निपटने के लिए अपने प्रशिक्षण और उपकरणों को लगातार उन्नत और अनुकूलित करने की आवश्यकता है।

त्वरित प्रतिक्रिया: समय को जीतना

प्रतिक्रिया समय को मिनटों से घटाकर सेकंडों में लाना और हर पल तत्परता सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित निगरानी नेटवर्क और एआई-सक्षम उपकरणों को अपनाना महत्वपूर्ण है। यह देखा गया है कि पड़ोसी देशों में अस्थिरता अक्सर समुद्री क्षेत्र में भी फैल जाती है। म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य क्षेत्रीय देशों में उत्पन्न होने वाली अस्थिरता, घुसपैठ, अवैध प्रवास और अनियमित समुद्री गतिविधियों के कारण तटीय सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। ऐसे में, आईसीजी को न केवल नियमित निगरानी बनाए रखनी होगी, बल्कि भू-राजनीतिक और बाहरी गतिविधियों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए भी हमेशा तैयार रहना होगा। बंदरगाह, नौवहन मार्ग और ऊर्जा अवसंरचना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा होती हैं। समुद्री व्यापार में किसी भी तरह का व्यवधान न केवल सुरक्षा, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा को एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में देखा जाना चाहिए।

आईसीजी की शानदार उपलब्धियां

अपनी स्थापना के बाद से, आईसीजी ने भारतीय जल क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में शामिल 1638 विदेशी जहाजों और 13775 विदेशी मछुआरों को पकड़ा है। इसके अलावा, 37833 करोड़ रुपये मूल्य के 6430 किलोग्राम नशीले पदार्थ भी जब्त किए गए हैं। इस साल जुलाई तक, 76 बचाव मिशन चलाए गए, जिनमें 74 लोगों की जान बचाई गई, और आपदा प्रतिक्रिया अभियानों में कुल मिलाकर 14500 से अधिक लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एमवी वान हाई 503 में आग लगने और केरल तट पर एमवी एमएससी ईएलएसए-3 के डूबने जैसी गंभीर घटनाओं के दौरान, आईसीजी ने अपनी परिचालन तत्परता और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं का भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

आईसीजी कमांडर्स सम्मेलन 2025 का मुख्य उद्देश्य अंतर-सेना समन्वय को बढ़ाना, समुद्री क्षेत्र में जागरूकता को सुदृढ़ करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य की क्षमताएं भारत की राष्ट्रीय समुद्री प्राथमिकताओं के अनुरूप हों। नौसेना प्रमुख और इंजीनियर-इन-चीफ सहित वरिष्ठ अधिकारी परिचालन प्रदर्शन, लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जिसमें भारत की समुद्री स्थिति को और मजबूत करने पर रणनीतिक जोर दिया जाएगा।

आईसीजी महानिदेशक परमेश शिवमणि ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए हाल की उपलब्धियों, परिचालन चुनौतियों और सेना के लिए एक रणनीतिक विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता पर भी विशेष बल दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार तथा रक्षा मंत्रालय और आईसीजी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


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