13 घंटे की नौकरी, रूस-अमेरिका से भी बदतर? कर्मचारियों का गुस्सा, सड़कों पर हंगामा!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
5 Min Read
ग्रीस के लोग प्राइवेट क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए रोजाना 13 घंटे तक काम करने का विवादित कानून पास होने के बाद प्रदर्शन करते हुए. इमेज एक्स से लिया गया हैं.

ग्रीस में काम के घंटों पर घमासान: 13 घंटे की शिफ्ट, क्या यह सुधार है या शोषण?

दुनिया का चक्का तेज़ी से घूम रहा है, और इसके साथ बदल रहा है काम करने का तरीका। पहले जो दफ्तर की चारदीवारी तक सीमित था, अब वो लैपटॉप और मोबाइल के ज़रिए घर-घर तक पहुँच गया है। सुबह से लेकर रात तक काम का अंबार, डेडलाइन का खौफ और निजी ज़िंदगी के लिए वक्त की कमी – यह एक हकीकत बन चुकी है। ऐसे में, ग्रीस से आई एक खबर ने इस सवाल को एक बार फिर हवा दे दी है कि आखिरकार इंसान कितना काम करे?

ग्रीस की संसद ने एक ऐसा कानून पारित किया है जो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को दिन में 13 घंटे तक काम करने की इजाज़त देता है। सरकार इसे “आधुनिक ज़रूरतों के हिसाब से ज़रूरी सुधार” कह रही है, लेकिन देशवासी और कर्मचारी इसे शोषण का नया अध्याय मान रहे हैं।

नया कानून: क्या कहता है?

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीस की संसद में इस विवादास्पद कानून को भारी विरोध के बीच मंज़ूरी मिली। विपक्ष, कर्मचारी संघ और मज़दूर संगठन इसे “पुराने ज़माने का फैसला” करार दे रहे हैं। इस कानून के तहत, कर्मचारियों को प्रतिदिन 13 घंटे काम करने की छूट होगी, लेकिन सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह से वैकल्पिक है और केवल प्राइवेट सेक्टर में लागू होगा। साथ ही, इसे एक साल में 37 दिनों से ज़्यादा तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ओवरटाइम की ऊपरी सीमा 150 घंटे प्रति वर्ष रखी गई है, जबकि साप्ताहिक काम के घंटे पहले की तरह 40 ही रहेंगे।

यह कानून सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी ‘न्यू डेमोक्रेसी पार्टी’ के समर्थन से पास हुआ, वहीं वामपंथी ‘पासोक पार्टी’ ने इसके खिलाफ वोट किया और ‘सिरिजा पार्टी’ ने मतदान से दूरी बना ली। सरकार का दावा है कि ये बदलाव ग्रीस के पुराने श्रम कानूनों को “वर्तमान दौर के अनुरूप” बनाएंगे।

सरकार का पक्ष: “लचीलापन” या “मजबूरी”?

ग्रीस की लेबर मिनिस्टर, निकी केरामेस, ने संसद में तर्क दिया कि यह कदम यूरोपीय संघ के नियमों के तहत है, जहाँ ओवरटाइम सहित औसत कार्य सप्ताह 48 घंटे तक सीमित है। मंत्री के अनुसार, यह सुधार “कर्मचारियों को लचीलापन प्रदान करने” के उद्देश्य से है, न कि उन्हें मजबूर करने के लिए। सरकार का मानना है कि इससे कंपनियां और कर्मचारी, दोनों ही अपनी सुविधानुसार काम के घंटे तय कर सकेंगे।

विरोधियों की आवाज़: “यह सुधार नहीं, शोषण का हथियार है!”

अमेरिकी समाचार वेबसाइट ‘पोलिटिको’ के अनुसार, लेबर मार्केट के विशेषज्ञ और यूनियनों का मानना है कि यह कानून असल में ओवरटाइम को वैध बना देगा, जिससे नियोक्ताओं को मनमानी करने की खुली छूट मिल जाएगी। ग्रीस के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के संगठन, ‘ग्रीक जनरल कन्फेडरेशन ऑफ लेबर’, ने श्रम मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि यह कानून नौकरी की असुरक्षा को बढ़ावा देगा और अस्थायी व अनिश्चित काम के मॉडल को और मज़बूत करेगा। जानकारों का मानना है कि इससे कर्मचारियों में थकान, मानसिक तनाव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा। सरकार का कहना है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ काम का समय निश्चित नहीं होता, जैसे शिफ्ट में काम या प्रोजेक्ट-आधारित कार्य, वहाँ यह नियम मददगार साबित हो सकता है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह “लचीलापन” वास्तव में कर्मचारियों के लिए है, या फिर यह केवल कंपनियों की सुविधा बढ़ाने का जरिया है? कानून के पारित होते ही, एथेंस और देश के अन्य शहरों में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए। उनके हाथों में बैनर थे जिन पर लिखा था – “हम मशीन नहीं हैं”, “हमें इंसाफ चाहिए”। यह विरोध केवल काम के घंटों को लेकर नहीं था, बल्कि उस बढ़ते दबाव के खिलाफ भी था जो आज की कार्य संस्कृति ने लोगों पर डाल दिया है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version