$130 बिलियन का ‘महा-झटका’! सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेहाल ट्रंप, क्या खाली होगी अमेरिका की तिजोरी?

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130 बिलियन डॉलर लौटाएगा अमेरिका? टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेचैन ट्रंप, दुनिया भर में किरकिरी

दुनिया की धड़कनें तेज: क्या ट्रंप के टेरिफ थे ‘असंवैधानिक’? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा ऐतिहासिक फैसला!

आज पूरी दुनिया की निगाहें वाशिंगटन की ओर मुड़ी हुई हैं, जहाँ एक ऐसा फैसला आने वाला है जो न केवल डोनाल्ड ट्रंप की सरकार बल्कि भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकता है। सवाल सीधा है—क्या ट्रंप ने ‘नेशनल इमरजेंसी’ कानून का सहारा लेकर अपनी संवैधानिक सीमाओं को लांघा था? यदि सुप्रीम कोर्ट ने इन टेरिफ को अवैध करार दिया, तो अमेरिका के सामने 130 बिलियन डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की रकम वापस लौटाने का एक बहुत बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा।

अदालती गणित की बात करें तो नौ जस्टिस में से केवल तीन ही ट्रंप के समर्थक माने जाते हैं, जबकि बाकी बेंच पहले ही टेरिफ के कानूनी आधार को कमजोर बताने के संकेत दे चुकी है।

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इस फैसले का असर सरहदों तक सीमित नहीं है। वाशिंगटन की अदालत के बाहर जितनी हलचल है, वैसी ही बेचैनी वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में भी साफ देखी जा सकती है। यह फैसला चीन से लेकर भारत तक के ग्लोबल ट्रेड का भविष्य तय करेगा। ट्रंप के लिए यह ‘करो या मरो’ की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि फैसला उनके खिलाफ गया, तो अमेरिका ‘वित्तीय अराजकता’ के भंवर में फंस जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों और ट्रेड एनालिस्ट्स का भी मानना है कि टेरिफ के खिलाफ फैसला आने की संभावना अधिक है, जो वैश्विक व्यापार के समीकरण बदल सकता है।

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ट्रंप ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट’ का उपयोग कर नेशनल इमरजेंसी घोषित की थी और चीन पर भारी ड्यूटी के साथ यूनिवर्सल टेरिफ थोप दिए थे। इससे अब तक 130 बिलियन डॉलर से ज्यादा की वसूली की जा चुकी है। निचली अदालतें पहले ही इसे कानून का उल्लंघन मान चुकी हैं। अब सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि क्या राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल किया या मर्यादा पार की। ट्रंप का तर्क है कि इतनी बड़ी रकम लौटाना अमेरिका की आर्थिक कमर तोड़ सकता है, इसीलिए उन्होंने इसे ‘नेशनल सिक्योरिटी’ से जोड़कर अदालत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की भी कोशिश की है।


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