क्या पाकिस्तान के परमाणु बम किराये पर उठेंगे? सऊदी अरब से रक्षा समझौते पर मचे घमासान पर एक नजर
कंगाल पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की हकीकत पर सवालिया निशान बने हुए हैं। क्या ये बम वाकई पाकिस्तान के पास हैं, या अमेरिका के नियंत्रण में? और अगर हैं भी, तो क्या वे इस्तेमाल के लायक स्थिति में हैं? इन सब अनसुलझे सवालों के बीच, पाकिस्तान के परमाणु बमों को किराये पर देने की खबरें गरमा गईं।
हाल ही में, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि नए रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को उपलब्ध कराया जाएगा। यह बयान पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक पारस्परिक रक्षा समझौते के ठीक बाद आया, जिस पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हस्ताक्षर किए थे।
लेकिन रक्षा मंत्री के इस बयान के चौबीस घंटे भी नहीं बीते थे कि मामला एकदम पलट गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साध ली। जब इस बारे में पूछा गया, तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफ़क़त अली ख़ान ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि “हमारा सिद्धांत एक आंतरिक मामला है। हम किसी के साथ समन्वय नहीं करते।”
परमाणु नीति या सिद्धांत? विदेश मंत्रालय का ‘आंतरिक मामला’
जब पाकिस्तानी अखबार डॉन ने विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में यह सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान की परमाणु नीति या सिद्धांत भारत-विशिष्ट है, और क्या यह एक जीवंत दस्तावेज़ है जिसकी नियमित समीक्षा की जाती है और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे हितधारकों के साथ समन्वय किया जाता है, तो प्रवक्ता ने फिर वही दोहराया।
उन्होंने कहा, “हमारा सिद्धांत एक आंतरिक मामला है। इस अर्थ में हम किसी के साथ समन्वय नहीं करते। हम कई देशों के साथ रणनीतिक स्थिरता वार्ता करते हैं जहाँ हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं और एक-दूसरे को अपने आकलन से अवगत कराते हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन जिस सिद्धांत को हमने विकसित किया है और आगे भी करते रहेंगे, वह हमारा आंतरिक मामला है। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि दूसरे देश हमें क्या बताते हैं या हमसे क्या कहते हैं। मैं यहाँ सिद्धांत की विशिष्टता पर टिप्पणी करने के लिए नहीं हूँ, लेकिन हमारी स्थिति सर्वविदित है।”
रक्षा मंत्री का दावा और विदेश मंत्रालय का इनकार
यह सब तब हुआ जब ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि “हमारे पास जो कुछ है और जो क्षमताएं हमारे पास हैं, वे इस समझौते के अनुसार (सऊदी अरब को) उपलब्ध कराई जाएंगी।” रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए उस नए रक्षा समझौते के बाद आई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल मचा दी है।
यह मामला जहां एक तरफ पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों और परमाणु सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब के साथ उसके बढ़ते रक्षा समीकरणों को भी उजागर करता है। विदेश मंत्रालय की चुप्पी और रक्षा मंत्री के बयान के बीच का अंतर, पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लेकर और भी अधिक अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
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